औरैया (अटसू)। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक परिवार अपने जिस बेटे का अंतिम संस्कार कर चुका था और उसके शुद्धि कार्यक्रम (श्राद्ध) की रस्में निभा रहा था, वही बेटा अचानक उनके सामने जिंदा खड़ा हो गया। उसे जिंदा देखकर न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव के होश उड़ गए। अपना ही अंतिम संस्कार और शुद्धि कार्यक्रम होता देख वह युवक भी सन्न रह गया। अब पुलिस और प्रशासन के सामने यह यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया है कि यदि यह युवक जिंदा है, तो फिर जिसका अंतिम संस्कार किया गया, वह कौन था?
अपना ही ‘श्राद्ध’ देख सन्न रह गया कमल
जानकारी के अनुसार, अटसू क्षेत्र के ग्राम सैदपुर निवासी कमल सिंह पारिवारिक विवाद के चलते लगभग डेढ़ साल पहले घर छोड़कर चला गया था। हाल ही में परिजनों ने एक अज्ञात शव को कमल समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। शनिवार शाम जब अंतिम संस्कार के तीसरे दिन शुद्धि का कार्यक्रम चल रहा था, तभी कमल अचानक घर पहुंच गया।
पूछताछ में कमल ने बताया कि घर छोड़ने के बाद वह पानीपत (हरियाणा) में मजदूरी कर रहा था। वहां एक हादसे में उसका पैर टूट गया था, जिसके कारण वह परिवार से संपर्क नहीं कर सका और अब जाकर वापस लौटा है।
होटल के मलबे में मिला था वो अज्ञात शव
दरअसल, 18 जुलाई को क्षेत्र के भीखेपुर गांव के पास हाईवे किनारे ढहाए गए एक अवैध जर्जर होटल के मलबे के पास से बदबू आने पर पुलिस को सूचना दी गई थी। पुलिस ने मौके से एक सड़ा-गला शव बरामद किया था। मृतक मेहरून रंग की शर्ट और नीले रंग का लोअर पहने था। शव का आधा मुंह कुचला हुआ था और कीड़े पड़ चुके थे।
भाई ने की थी गलत शिनाख्त
25 जून से कमल का मोबाइल स्विच ऑफ था और उससे बात नहीं हो पा रही थी। इसी आधार पर कमल के भाई दशरथ ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर उस अज्ञात शव की शिनाख्त अपने भाई कमल के रूप में कर दी थी। इसके बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया था और उन्होंने कमल मानकर उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया।
अब असली शव की तलाश में जुटी पुलिस
कमल के जिंदा होने की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और पुलिस टीम तुरंत गांव दौड़ पड़ी। पुलिस कमल को पूछताछ के लिए कोतवाली ले आई है। वहीं, कमल की ससुराल पक्ष के लोग भी वहां पहुंच गए हैं।
पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) अजीतमल, मनोज गंगवार ने बताया कि कमल सिंह के जीवित मिलने के बाद मामले की दोबारा गहन जांच शुरू कर दी गई है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि जिस अज्ञात शव का अंतिम संस्कार किया गया था, वह वास्तव में किसका था? इसके लिए विधिक कार्रवाई की जा रही है और जांच के आधार पर ही आगे का कदम उठाया जाएगा।

