अमरोहा।किसानों की विभिन्न समस्याओं और सरकारी नीतियों के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने सोमवार को अमरोहा कलेक्ट्रेट पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष रामपाल सिंह के नेतृत्व में भारी संख्या में जुटे किसानों ने प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया। प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों— एक्सप्रेसवे के मुआवजे, एमडीए (MDA) के नए नियमों और अमेरिका के साथ कृषि समझौते पर किसानों ने अपना आक्रोश जाहिर किया।
सर्किल रेट बढ़ाकर मिले उचित मुआवजा
प्रदर्शन के दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष रामपाल सिंह ने कहा कि हरिद्वार तक प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के लिए किसानों की बेशकीमती जमीन अधिग्रहित की जा रही है। उन्होंने सरकार से तत्काल सर्किल रेट बढ़ाने की मांग की, ताकि जिन किसानों की जमीन इस प्रोजेक्ट में जा रही है, उन्हें उचित मुआवजा मिल सके और वे अपने परिवारों के साथ दोबारा सम्मानपूर्वक बस सकें।
MDA के नए नियमों का कड़ा विरोध
किसानों ने मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) के उस नए नियम का पुरजोर विरोध किया, जिसके तहत हाईवे किनारे एक-एक किलोमीटर के दायरे में भवन निर्माण के लिए नक्शा पास कराना अनिवार्य कर दिया गया है। रामपाल सिंह ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि किसान इस तानाशाही नियम को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे। किसानों का तर्क है कि इससे ग्रामीण इलाकों में घर बनाने वालों का शोषण होगा।
कृषि व्यापार समझौता है ‘किसान विरोधी’
इसके अलावा, किसानों ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित कृषि व्यापार समझौते पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। भाकियू नेताओं का कहना है कि यह समझौता पूरी तरह से भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ है। इससे विदेशी कंपनियों को फायदा होगा और देसी किसान बर्बाद हो जाएंगे। भारतीय किसान यूनियन ने ऐलान किया है कि वे इस समझौते का राष्ट्रीय स्तर पर कड़ा विरोध करेंगे।

