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Haryana ITI Stipend: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, ITI करने वाले EWS छात्रों को हर महीने मिलेंगे 2000 रुपये

On: June 29, 2026 5:53 PM
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cm sani
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Haryana ITI Stipend:चंडीगढ़ से युवाओं के लिए एक बेहद काम की और राहत देने वाली खबर है। अक्सर देखा जाता है कि पैसों की तंगी के चलते कई होनहार छात्र अपनी तकनीकी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। इस गंभीर समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए हरियाणा सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) में दाखिला लेने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के विद्यार्थियों के लिए Haryana ITI Stipend की शुरुआत की है। इस नई पहल के तहत अब इन छात्रों को तकनीकी शिक्षा पूरी करने के लिए हर महीने 2000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी।

दरअसल, सरकार का यह कदम हुनरमंद युवाओं को तलाशने और उन्हें तराशने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। बताया जा रहा है कि इस स्टाइपेंड का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी युवा सिर्फ गरीबी या आर्थिक लाचारी की वजह से अपने कदम पीछे न खींचे। अधिकारियों का मानना है कि हर महीने मिलने वाली इस तय रकम से न सिर्फ आईटीआई में छात्रों का रुझान और दाखिला बढ़ेगा, बल्कि क्लास में उनकी नियमित उपस्थिति (Attendance) भी पक्की हो सकेगी। अंततः इससे उद्योगों के लिए एक शानदार और प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होगा।

Haryana ITI Stipend का फायदा और दाखिले का गणित

अगर आप भी इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो यह आपके लिए बिल्कुल सही समय है। असल में, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए हरियाणा के आईटीआई संस्थानों में एडमिशन की प्रक्रिया जोरों पर चल रही है। पूरे प्रदेश में इस समय 377 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान संचालित हैं, जिनमें 197 सरकारी और 180 निजी संस्थान शामिल हैं। इस साल करीब एक लाख सीटों पर युवाओं को एडमिशन दिया जा रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि छात्रों के पास 89 से अधिक इंजीनियरिंग और गैर-इंजीनियरिंग ट्रेड चुनने का शानदार विकल्प है। इसमें पुरानी और पारंपरिक ट्रेड से लेकर आज के समय की आधुनिक तकनीक वाले कोर्स भी शामिल किए गए हैं, ताकि युवा समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।

अब सिर्फ किताबें नहीं, कारखानों में मिलेगी सीधी ट्रेनिंग

पढ़ाई के तरीके में भी सरकार ने एक बड़ा और जरूरी बदलाव किया है। राज्य सरकार इन दिनों ‘ड्यूल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग’ (DST) पर सबसे ज्यादा फोकस कर रही है। यह एक ऐसा आधुनिक मॉडल है जिसमें छात्रों को सिर्फ क्लासरूम की चारदीवारी या कॉलेज की वर्कशॉप तक सीमित नहीं रखा जाएगा।

इसके बजाय, ट्रेनिंग के दौरान ही उन्हें असली उद्योगों और फैक्ट्रियों में ले जाकर व्यावहारिक अनुभव (प्रैक्टिकल नॉलेज) दिया जाएगा। जब छात्र खुद अपने हाथों से मशीनों पर काम करेंगे, उत्पादन की बारीकियां समझेंगे और सुरक्षा मानकों को अपनी आंखों से देखेंगे, तो उनका अनुभव एकदम अलग होगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कोर्स खत्म होने के बाद इन युवाओं को नौकरी के लिए दर-दर भटकना या अलग से कोई तैयारी नहीं करनी पड़ेगी।

रोजगार और इंडस्ट्री की डिमांड का परफेक्ट तालमेल

कुल मिलाकर देखा जाए तो हरियाणा सरकार अब तकनीकी शिक्षा को सीधे तौर पर उद्योगों की डिमांड से जोड़ रही है। एक तरफ जहां गरीब और ईडब्ल्यूएस छात्रों को स्टाइपेंड देकर पढ़ाई से जोड़े रखने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ सिलेबस को पूरी तरह से ‘इंडस्ट्री-रेडी’ बनाया जा रहा है। स्थानीय लोगों और शिक्षाविदों के अनुसार, सरकार की इस दोतरफा रणनीति से आने वाले समय में न सिर्फ युवाओं के लिए बेहतरीन रोजगार के अवसर खुलेंगे, बल्कि राज्य की फैक्ट्रियों और कंपनियों को भी एक कुशल और प्रशिक्षित वर्कफोर्स मिल सकेगी।

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