Amroh News-अमरोहा: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जनपद से एक ऐसी प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है, जो आज के समय में मानवता और सच्ची समाज सेवा की एक अनूठी मिसाल पेश करती है। कहा जाता है कि जब इंसान के भीतर सेवा का भाव सच्चा हो, तो उसे नेक काम करने का अवसर अपने आप मिल ही जाता है। इस बात को अक्षरशः सच कर दिखाया है फत्तेहपुर निवासी समाजसेवी और पेशे से पत्रकार भरत सिंह ने।
भानपुर क्रॉसिंग पर मासूमों को देख ठिठके कदम
यह वाकया उस समय का है जब पत्रकार भरत सिंह अमरोहा से अपना कुछ जरूरी काम खत्म करके गजरौला की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान जैसे ही वे भानपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास पहुंचे, उनकी नजर सड़क किनारे मौजूद दो छोटे मासूम बच्चों पर पड़ी। बच्चों की हालत बेहद दयनीय थी— कड़कड़ाती धूप और धूल के बीच उनके तन पर पूरे कपड़े नहीं थे और पैरों में पहनने के लिए चप्पल तक नहीं थी।
यह हृदय विदारक दृश्य देखकर भरत सिंह का दिल पसीज गया और उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी रोक ली। जब उन्होंने उन बच्चों के पास जाकर उनसे प्यार से बातचीत की, तो कुछ ही देर में बच्चों की मां भी वहां पहुंच गईं।
मां की मजबूरी सुन भर आई आंखें, तुरंत लिया ये फैसला
बातचीत के दौरान जब बच्चों की मां ने अपनी खराब आर्थिक स्थिति और बेबसी के बारे में बताया, तो पत्रकार भरत सिंह बेहद भावुक हो गए। उन्होंने उसी पल यह संकल्प लिया कि आज वे इन बच्चों की हर संभव मदद करेंगे। बिना एक पल की भी देरी किए, भरत सिंह उन बच्चों को लेकर पास के बाजार गए। वहां से उन्होंने दोनों बच्चों के लिए उनके नाप के नए कपड़े और पैरों के लिए चप्पलें खरीदीं।
जब भरत सिंह ने वे नए कपड़े और चप्पलें उन मासूमों को पहनाईं, तो बच्चों के साथ-साथ उनकी बेबस मां के चेहरे पर जो सुकून और खुशी की चमक थी, वह किसी भी बड़े इनाम से बढ़कर थी।
दिखावे से नहीं, सच्चे प्रयासों से होती है सेवा
इस नेक काम के बाद बातचीत करते हुए भरत सिंह ने कहा कि, “सच्ची समाज सेवा वही है, जिसमें किसी जरूरतमंद को ठीक उसी वक्त मदद दी जाए, जब उसे उसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो।” उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति इस तरह बेसहारा या परेशान न रहे।
यह घटना पूरे समाज को यह कड़ा और स्पष्ट संदेश देती है कि समाज सेवा बड़े-बड़े मंचों, भाषणों या दिखावे से नहीं होती, बल्कि सड़क किनारे किए गए ऐसे छोटे-छोटे लेकिन सच्चे प्रयासों से होती है। वास्तव में, भरत सिंह जैसे लोग ही हमारे समाज के ‘असली नायक’ (Real Heroes) हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के इंसानियत का धर्म निभा रहे हैं।

