*स्वामी मुक्तेश्वर आनंद के बयान पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के नेता का बयान, जताई कड़ी आपत्ति*
सहसवान(बदायूं)मोहम्मद कमर चौधरी प्रांत संयोजक ब्रज प्रांत मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने स्वामी मुक्तेश्वर आनंद द्वारा वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. इंद्रेश कुमार के खिलाफ दिए गए बयान पर संयुक् रूप से कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
दोनों नेताओं ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि यह बयान अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, अनुचित और निंदनीय है।
इस प्रकार की असम्मानजनक बयानबाज़ी न केवल एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व की गरिमा को ठेस पहुँचाती है, बल्कि समाज में अनावश्यक वैमनस्य और तनाव पैदा करने का भी कार्य करती है।
“सम्मानित व्यक्तियों पर इस तरह की टिप्पणी अस्वीकार्य”
मोहम्मद कमर चौधरी ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक मंच से इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करना निंदनीय है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए सभी को जिम्मेदार आचरण करना चाहिए।
डॉ. इंद्रेश कुमार के योगदान को बताया प्रेरणादायक
उन्होंने बयान में उन्होंने कहा कि डॉ. इंद्रेश कुमार का जीवन समाज सेवा, राष्ट्र निर्माण और विभिन्न समुदायों के बीच भाईचारे को मजबूत करने के कार्यों के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने वर्षों तक समाज में सकारात्मक संवाद स्थापित करने और देशहित में कार्य किया है।
ऐसे में उनके प्रति इस प्रकार की टिप्पणी करना न केवल अनुचित है, बल्कि उनके समर्थकों और अनुयायियों की भावनाओं को भी आहत करता है।
कार्यकर्ताओं से विरोध दर्ज कराने की अपील की है।
श्री चौधरी ने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समाज के जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे इस प्रकार की गैर-जिम्मेदाराना बयानबाज़ी की कड़ी निंदा करें और सोशल मीडिया सहित सभी मंचों पर इसका विरोध दर्ज कराएं।
“भाईचारे और सकारात्मकता को बढ़ावा दें”
उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि हम सभी आपसी सम्मान, भाईचारे और सद्भाव की भावना को मजबूत करें। किसी भी प्रकार के विवादित और भड़काऊ बयानों से समाज को नुकसान होता है, इसलिए ऐसे बयानों से बचना चाहिए।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी जरूरी
संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन उस अधिकार के साथ मर्यादा और जिम्मेदारी का पालन करना भी आवश्यक है। किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं हो सकती।
एकजुट होकर विरोध का आह्वान
अंत में सभी से आह्वान किया कि वे इस प्रकार की नकारात्मक और विभाजनकारी सोच के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों और समाज में शांति, सद्भाव और सम्मान की संस्कृति को मजबूत करे।

