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Sahaswan news :- सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग प्रदेश अध्यक्ष ने जामनी क्षेत्र मैं हो रहे बांध कटान का मौके पर पहुंचकर किया निरीक्षण

On: September 6, 2025 7:39 PM
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*सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग प्रदेश अध्यक्ष ने जामनी क्षेत्र मैं हो रहे बांध कटान का मौके पर पहुंचकर किया निरीक्षण*,

#अधीनस्थों को दिए दिशा निर्देश, बांध किसी भी कीमत पर सुरक्षित रखना अधीनस्थों का दायित्व#

“बांध टूटने के डर से जामनी ग्राम खाली, आबादी सुरक्षित स्थानों की तलाश में ढूंढ रहीं हैं ठिकाना “

[समर इंडिया के लिए सहसवान से एस ,पी सैनी की खास रिपोर्ट ]

सहसवान (बदायूं) सहसवान तहसील क्षेत्र में बहने वाली गंगा नदी में प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़ के प्रभाव को रोकने के लिए बीते कई दशक से सुरक्षा कवच के रूप में इस्तेमाल होकर क्षेत्र को एक बहुत बड़े नुकसान से बचाने के लिए गंगा महावा नदी बांध इस बार बीते 3 दिन से बाढ़ खंड के अधिकारी कर्मचारी गण बांध को गंगा नदी के तेज वहाब से हो रहे कटान को रोकने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं अगर इस बार बांध को उपरोक्त बाढ़ खंड की टीम बचाने में कामयाब हो जाते है तो निश्चित एक बहुत बड़ी आपदा से क्षेत्र को बचाया जा सकता है। यही कारण है की सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग लखनऊ के विभाग अध्यक्ष को मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना पड़ा उन्होंने मौके पर पहुंचकर अधिन्यास्तों को दिशा निर्देश दिए कि वह किसी भी कीमत पर गंगा के पानी से हो रहे बांध के कटान को रोकने के लिए जो भी संभव कार्य हो उसका शीघ्र से शीघ्र कर बाँध को सुरक्षा मुहैय्या कराए जाने का प्रबंध करें इसमें किसी भी प्रकार की कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी इससे पूर्व जिला अधिकारी अवनीश राय भी दो बार मौके पर पहुंचकर बाढ़ खंड के अधिकारियों को दिशा निर्देश दे चुके हैं। जामनी ग्राम के 580 परिवार बाँध कटने के डर से जिसकी आबादी लगभग 3000 के लगभग है सुरक्षित स्थानों के लिए प्रस्थान कर गए जिससे पूरा ग्राम खाली हो गया प्रशासन ने भी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की बाँध कटने की संभावना को देख कर पहले ही अपील कर रहा है।

ज्ञात रहे सहसवान तहसील क्षेत्र में बहने वाली गंगा नदी में आई बाढ़ के चलते बाढ़ के प्रभाव को रोकने के लिए महावा गंगा नदी बांध लगभग चार दशक पूर्व बनाया गया था जिससे गंगा के प्रभाव को सहसवान तहसील क्षेत्र के सीमावर्ती ग्रामों में होने वाले नुकसान को रोका जा सके उपरोक्त बांध पर प्रत्येक वर्ष वर्षा ऋतु के दौरान छुटपुट कार्य कर कर मरम्मत करा दी जाती है परंतु उसके लिए कोई भी ठोस योजना को असली जामा नहीं पहनाया जाता जिससे बांध पर चलने वाले वाहन के कारण दर्जनों स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो जाता है साथ ही साथ विगत वर्षों में आने वाली बाढ़ के पानी से भी बांध के किनारे क्षतिग्रस्त हो जाते हैं परंतु बाढ़ खंड के अधिकारियों द्वारा वर्षा ऋतु में बाढ़ की संभावना के मध्य नजर छूठ मुठ कार्य कर दिया जाता है परंतु उसके बाद कोई भी बोल खंड का कार्य उपरोक्त बांध को देखने की हिमांकत नहीं करता है।

सहसवान तहसील क्षेत्र के ग्राम नगला कोतल से दियोरा शेखपुर के मजरा सिवारक तक लगभग 18 किलोमीटर लंबे बांध के सहारे वीर सहाय नगला, खागी नगला, तोफी नगला, आसेनगला, गिरधारी नगला तो प्रत्येक वर्ष गंगा नदी के निकट बांध के उसे पर होने से पूर्ण रूप से प्रभावित होते हैं परंतु इस बार गंगा नदी का रौद्र रूप ने ग्राम पंचायत दियोरा शेखपुर के मजरा सोन कला सोन सिवारक को भी इस बार अपनी चपेट में ले लिया उपरोक्त गांव में भी बड़े पैमाने पर लोगों को आर्थिक स्थिति उठानी पड़ रही है और लोग अस्थाई रूप से बनाए गए कैंपों में पशु एवं परिवारों के साथ ठहरे हुए हैं।

बीते कई दिनों से गंगा नदी में आई भयंकर बाढ़ के चलते गंगा की तेज बहाव ने बांध को भी अपनी चपेट में ले लिया है जानकार सूत्रों का कहना है की गंगा नदी के पानी का तेज बहाव कई स्थानों पर बांध को भी नीचे नीचे खोखला कर रहा है जिससे बांध के क्षतिग्रस्त होने की संभावना है प्रबल होती जा रही हैं मौके पर दिन-रात बाढ़ खंड के अधिकारी सैकड़ो कर्मचारी मजदूर के साथ जेसीबी मशीन, बांस कटर बोरी में रेत भरकर, तथा बल्ली पालन के माध्यम से गंगा के तेज बहाव को बांध के सहारे रोककर रोकने का प्रयास कर रहे हैं परंतु उपरोक्त बाढ़ खंड के अधिकारी एवं कर्मचारी बांध के गंगा के तेज बहाव से हो रहे कटान को रोक पाने में कितने सफल होते हैं कितने असफल यह तो आने वाला समय ही बताएगा परंतु इस बार बाढ़ खंड अधिकारियों की अग्नि परीक्षा का प्रश्न है देखना है कि वह इस बार भी गंगा नदी के तेज बहाव द्वारा बांध के किए जा रहे काटन को रोक पाने में सफल हो पाते हैं या असफल जिस पर गंगा नदी से प्रभावित होने वाले क्षेत्र के हजारों लोगों की निगाहें लगी हुई हैं जो बांध कटने पर पूर्ण रूप से प्रभावित हो जाएंगे इसको लेकर वह भयभीत होते नजर आ रहे हैं प्रभावित होने वाले क्षेत्र के रामचंद्र, सुखलाल, प्रेमी, नन्हे, चंद्रभान, जागन ,सुखपाल, प्रेमचंद, जीवनलाल, खुशी, तेजपाल ने बड़े मायूस होकर बताया कि की बाढ़ खंड के अधिकारी पहले से सजग होते और निष्ठा ईमानदारी के साथ उन्होंने गंगा महावा नदी बांध पर ठोस मजबूत कार्य किए कराए होते तो शायद बाल खंड के अधिकारियों को इतना कठिन परिश्रम नहीं करना पड़ता साथ ही साथ लखनऊ से सिंचाई विभाग एवं जल संसाधन विभाग के अध्यक्ष को मौके पर पहुंचकर खुद निरीक्षण नहीं करना पड़ता है। जबकि बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता उमेश चंद सहायक अभियंता एक के तिलक जूनियर इंजीनियर रामावतार कई जेसीबी मशीन का ट्रैक्टर ट्राली एवं विभाग के मजदूर कर्मचारी बांध को सुरक्षित बचाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं उनकी यह मेहनत कहीं बानिगी बनकर न रह जाए यह चिंता क्षेत्र के लोगों को दिन-रात सताए जा रही है।

उन्होंने कहा की वर्षा ऋतु से पूर्व बाढ़ खंड के अधिकारियों को शास न द्वारा निर्देश दिया जाता है कि वह व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखें तथा बांध का मौके पर पहुंचकर बारीकी से निरीक्षण करें तथा उसकी पूर्ण रूप से मरम्मत कराए परंतु बाढ़ खंड के अधिकारियों की कुंभकरण नींद जब खुली है जब सब कुछ हाथ से निकल चुका है बांध को बचाए जाने के लिए जो भी प्रयास किया जा रहे हैं या अब तक हुए हैं वह ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।

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