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Sahaswan news :- गंगा की रूद्र रूप से आधा दर्जन से ज्यादा ग्रामों की आबादी जलमग्न, प्रशासन ने राहत सामग्री के पैकेट तो बांटे पीड़ितों ने उसे बताया ऊंट के मुंह में जीरा

On: August 9, 2025 9:28 PM
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*गंगा की रूद्र रूप से आधा दर्जन से ज्यादा ग्रामों की आबादी जलमग्न* *चारों तरफ जल ही जल*
“पशुओं के लिए चारे का संकट तो वही संक्रामक रोगों का बड़ा खतरा”
#प्रशासन ने राहत सामग्री के पैकेट तो
बांटे पीड़ितों ने उसे बताया ऊंट के मुंह में जीरा#

सहसवान (बदायूं) सहसवान तहसील क्षेत्र में बहने वाली गंगा नदी में बीते कई दिनों से बढ़ रहे जल स्तर ने रौद्र रूप धारण कर लिया है तथा दो ग्राम पंचायत के पांच ग्रामों को पूर्ण रूप से जलमग्न कर दिया है तथा उपरोक्त ग्रामों के आवागमन की सभी मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं गंगा के जल ने जहां आबादी को खतरा उत्पन्न कर दिया है तो वही पशुओं के लिए चारे का संकट बढ़ता जा रहा है
प्रशासन ने राहत के नाम पर 5 ग्रामों के 469 परिवारों को प्रदेश शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई राहत सामग्री की किट तो उपलब्ध करा दी गई परंतु पीड़ितों ने इसे ऊंट के मुंह में जीरा बताते हुए कहा कि बीते 5 दिन से ग्राम का बड़े हुए गंगा की जलस्तर ने पूर्ण रूप से संपर्क काट दिया है तथा घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है जिसके कारण खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही है विशेष का पशुओं के लिए प्रशासन द्वारा कोई भी खाद्य सामग्री या चारे की व्यवस्था नहीं कराई गई जिससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है।


गौरतलब है सहसवान तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत खिरकवारी मानपुर पुख्ता के मजरा तेलियानगला,तौफी
नगला तथा सितोलिया पुख्ता ग्राम पंचायत के मजरा भमरोलिया, वीर शाह नगला,खागीनगला पूर्ण रूप से जलमग्न हो गए हैं तथा बीते कई दिनों से उनका संपर्क मार्ग कटा हुआ है प्रशासन तेलिया नगला तौफी नगला के बाढ़ पीड़ितों को आवागमन के लिए दो नाव की व्यवस्था कर दी है पीड़ित परिवार उसे आवागमन में प्रयोग में ले रहे हैं परंतु प्रशासन द्वारा भमरोलिया, वीर सहाय नगला, खागी नगला में पीड़ित परिजनों को आवागमन के लिए नाव का प्रबंध नहीं कराया है जिससे वह अपने घरों से घरेलू सामान एवं रोजमर्रा के समान ला पानी में उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है वह बात अलग है कि प्रशासन ने उपरोक्त लोगों के ग्रामों को अस्थाई रूप से कैंप करने के लिए जूनियर हाई स्कूल मैं व्यवस्था कर दी है तथा वहीं पर प्राथमिक विद्यालय जिसमें बढ़ चौकी स्थापित है पीड़ित परिवार वहां भी आकर कैंप कर सकते हैं जबकि नगला वरन एवं तौफी नगला के पीड़ित परिवार अस्थाई रूप से महावा नदी पुल पर आश्रय स्थल बनाया गया है तथा बाढ़ ग्रस्त घरों से वह अपना घरेलू सामान तथा पशुओं को लेकर अस्थाई रूप के आश्रय स्थल में पहुंच गए हैं जहां वह पानी तानकर परिवार के साथ रह रहे हैं आश्रय स्थल में रह रहे पीड़ित परिवारों को सबसे ज्यादा चिंता अपने पशुओं की है जिन्हें चारे का संकट पैदा हो गया है । तथा भारी उमस के चलते संक्रामक रोगों का खतरा मंडराने लगा है लोगों का कहना है कि अभी तक स्वास्थ्य विभाग से कोई भी कर्मचारी उनके स्वास्थ्य का परीक्षण करने नहीं पहुंचा है जबकि कई लोग बुखार एवं उल्टी दस्त से पीड़ित है। खिराक
वारी मानपुरपुख्ता तथा सितोलिया पुख्ता का पंचायत घर बाढ़ के पानी से डूब गया है तो वही एक जूनियर हाई स्कूल भी बाढ़ के पानी से जलमग्न है।
पीड़ित परिवारों को सबसे ज्यादा चिंता भूमि कटान की हो रही है जिस रात और रात गंगा के पानी द्वारा बड़े पैमाने पर कटान हो रहा है।
एतिहद के तौर पर बाढ़ चौकिया पर तैनात किए गए अधिकांश कर्मचारी चौकियों से नदारत रहते हैं सिर्फ मोबाइल पर वह अपने संपर्क वाले लोगों से जानकारी लेकर अपने अधीनस्थों को चौकी पर तैनाती का एहसास कराते रहते हैं। अगर प्रशासन की अधिकारी रात के समय अचानक बाढ़ चौकिया का निरीक्षण करें तो निश्चित चौकिया पर तैनात कर्मचारी उन्हें नदारत मिलेंगे। यह कहना उपरोक्त बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के पीड़ित परिवारों का है उनका कहना है कि कर्मचारी मात्र औपचारिकता निभाने के लिए ही आते जाते रहते हैं शेष वह मोबाइल पर ही बाढ़ की स्थिति का आकलन अपने गुर्गों से पल-पल का अपडेट लेते रहते हैं।

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