झोलाछाप चिकित्सकों के यहां जन्मे नवजात शिशुओं के जन्म पंजीकरण का धंधा भी खूब फल फूल रहा है,
आखिर कौन है जिम्मेदार, सा, स्वा, केंद्र के जच्चा बच्चा केंद्र पर चल रहे जन्म पंजीकरण मैं जमकर हो रहा है गोलमाल, अधिकारी मौन आशाओं की हो रही है बल्ले बल्ले,
(सहसवान से समर इंडिया के लिए एसपी सैनी की रिपोर्ट)

सहसवान (बदायूं) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहे गोरख धंधे की परते दिन पर दिन खुलती जा रही है ऐसी ही एक परत की चर्चा कई दिनों से नगर एवं देहात क्षेत्र में जमकर हो रही है जहां नगर सहसवान के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कैंपस में चल रहे जच्चा बच्चा केंद्र में होने वाले जन्म पंजीकरण के नाम पर जमकर घोटाला हो रहा है और तो और देहात क्षेत्र में काम कर रही आशाएं भी इस मामले में लिप्त बताई जाती हैं वह भी जन्म पंजीकरण के नाम पर क्षेत्र से ढूंढ ढूंढ कर बच्चे बूढ़े महिलाएं पुरुष पुरुष बालिका एन सब के जन्म पंजीकरण दिलवाले जाने के नाम पर मोटा पैसा वसूल रहे हैं यह गोरख धंधा तो एक लंबे समय से चल रहा है परंतु किसी भी अधिकारी ने इस गोरख धंधे को देखना मुनासिब नहीं समझा और तो और इस गोरख धंधे में कई प्राइवेट लोग भी लगे हुए हैं जो कार्यालय में बैठकर जन्म प्रमाण पत्र के नाम पर जमकर धन वसूली करते हैं जन्म पंजीकरण अपलोड कहीं होता है पर जन्म प्रमाण पत्र कहीं दूसरे स्थान पर एक साइबर कैफे जिसमें स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का परसेंटेज तय होने के बाद आवेदक द्वारा 30 रुपए से लेकर₹50 तक की वसूली की जाती है जबकि नियम यह है जच्चा बच्चा केंद्र में चल रहे जन्म पंजीकरण का प्रमाण पत्र निशुल्क दंपति को प्रदान किया जाएगा परंतु सहसवान के जच्चा बच्चा केंद्र पर ऐसा नहीं होता है जन्म पंजीकरण के नाम पर अगर सीधा आवेदक पहुंच जाता है तो उससे 200 से लेकर ₹500 तक की वसूली की जाती है जबकि जो जन्म पंजीकरण प्रमाण पत्र के लिए अगर आशा देहात एवं नगर क्षेत्र से लेकर आती है तो उसे मात्र 100 से 150 रुपए की वसूली की जाती है जबकि आशा जन्म पंजीकरण करने वाले अभिभावकों से 500 से लेकर ₹1000 तक की वसूली करती है।

गोरख धंधे में अकेले अधिकारी ही नहीं है बल्कि इसमें कई और नकाबपोश भी शामिल है जो इस धंधे को खूब फलने फूलने का मौका दे रहे हैं, चर्चा है कुछ माह पहले तो सभी वर्ग की आयु के जन्म पंजीकरण प्रमाण पत्र बनाए जा रहे थे परंतु अब उस पर कुछ रोक लगी हुई है जन्म पंजीकरण के मामले की अगर जांच की जाए तो दूध का दूध पानी का पानी हो सकता है। परंतु इतनी हिम्मत और साहस किस में है जो जन्म पंजीकरण के नाम पर चल रहे गोरख धंधे के काले कारनामे पर हाथ डाले।
चर्चा तो यह है नगर एवं देहात क्षेत्र में चल रहे जच्चा बच्चा केंद्रों में हुए प्रसव के नवजात शिशु का जन्म पंजीकरण का धंधा भी स्वास्थ्य केंद्र पर जमकर फल फूल रहा है नवजात शिशु का जन्म तो झोलाछाप चिकित्सालय में होता है परंतु उनका जन्म पंजीकरण कराए जाने के लिए इस धंधे में लिप्त आशाएं डिस्चार्ज स्लिप भी फर्जी रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बनाकर जन्म पंजीकरण कर रही हैं।
मामला यहीं खत्म नहीं होता है बल्कि मामले की जांच यहां से की जाए की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा उससे संबंधित गांव देहात क्षेत्र में चल रहे प्रसव केदो पर कितनी गर्भवती महिलाओं के प्रसव कराए जाते हैं तथा प्रशब के उपरांत पैदा हुए नवजात शिशओ की गणना की जाए और जन्म पंजीकरण केंद्र पर जारी होने वाले प्रमाण पत्र की जांच की जाए तो मामला दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा क्योंकि संख्या में काफी अंतर होगा आखिर भारी तादाद में बच्चों का पंजीकरण का गोरख धंधा कहां से चल रहा है।
चर्चा यह है की जन्म पंजीकरण का कार्य स्वास्थ्य विभाग के किसी कर्मचारी द्वारा किया जाना चाहिए परंतु ऐसा न होकर इस गोरख धंधे में लगे प्राइवेट लोग जन्म पंजीकरण कार्य को अंजाम दे रहे हैं अगर यह मन भी लिया जाए कि उपरोक्त जन्म पंजीकरण के काम में प्राइवेट लोग लगे हुए हैं तो प्राइवेट लोगों की सैलरी कौन सा विभाग दे रहा है जांच इसकी भी होनी चाहिए आखिर उनकी सैलरी कहां से दी जा रही है अधिकारियों के नाक के नीचे चल रहे इस गोरख धंधे में आखिर अधिकारी क्यों चुप्पी साधे हैं यह सवाल समाजसेवियों की जुबान पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब देखना है की जन्म पंजीकरण के नाम पर चल रहे गोरख धंधे पर अधिकारीगढ़ फलने फूलने से रोकेंगे या फिर इस गोरख धंधे में और चार चांद लगाकर फलने फूलने का और मौका देंगे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
