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Uttarakhand का नया अनुभव: हिमालय दर्शन और देवदार के जंगलों में रहना अब होगा और भी खास

On: July 18, 2025 9:39 AM
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Uttarakhand News In Hindi : वन विभाग ने उत्तराखंड के चंपावत जिले के लोहाघाट क्षेत्र में इको टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके तहत लोहाघाट में पर्यटकों के ठहरने की सुविधा विकसित की जाएगी, जिससे पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद उठा सकें। यह क्षेत्र न केवल हरे-भरे देवदार के जंगलों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की शांत और ठंडी जलवायु भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। विभाग ने यहां की जैव विविधता और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना बनाई है।

Uttarakhand News In Hindi : नलिया में बनेंगे हिम दर्शन के लिए कॉटेज

लोहाघाट से वाराही देवी मंदिर मार्ग पर स्थित नलिया स्थान से हिमालय पर्वत श्रृंखला का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। यह स्थान गर्मियों में भी ठंडा रहता है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यहां छह कॉटेज बनाने की योजना है, जिससे पर्यटक हिमालय दर्शन के साथ-साथ शांत वातावरण का भी आनंद ले सकें। पहले यहां वन चेतना केंद्र हुआ करता था, जिसके जर्जर भवन को अब सुंदर और ठहरने योग्य बनाने का काम शुरू किया गया है।

 

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Uttarakhand News In Hindi : पुराने वन भवनों को ठहरने योग्य बनाया जाएगा

लोहाघाट क्षेत्र में पहले वन अनुसंधान की नर्सरी और भवन मौजूद थे, जिन्हें अब चंपावत वन प्रभाग को वापस सौंप दिया गया है। इन भवनों का सुदृढ़ीकरण और सौंदर्यीकरण कर उन्हें पर्यटकों के ठहरने के लिए उपयोग में लाया जाएगा। प्रभागीय वनाधिकारी नवीन पंत ने जानकारी दी कि यहां पर लगभग 10 परिवारों के ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। यह स्थान प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत सुंदर है और यहां ठहरने का अनुभव पर्यटकों को प्रकृति से और भी निकट ले जाएगा।

 

Uttarakhand News In Hindi : पर्यटन स्थलों से घिरा है लोहाघाट

लोहाघाट के आस-पास कई धार्मिक और पर्यटन स्थल भी हैं, जो इस क्षेत्र की महत्ता को और बढ़ाते हैं। बालेश्वर मंदिर, मायावती आश्रम, हिंगला देवी मंदिर, और वाराही देवी मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों के अलावा कोलीढेक झील और वाणासुर का किला भी पास ही स्थित हैं। इन स्थलों तक पहुंचना आसान है, और इनका इतिहास एवं पौराणिक महत्व पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मुख्य वन संरक्षक (इको टूरिज्म) प्रसन्न पात्रो के अनुसार, अन्य स्थानों पर भी प्रोजेक्ट बनाकर मुख्यालय को भेजे गए हैं, जिससे पूरे लोहाघाट क्षेत्र को एक प्रमुख इको टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा सके।

 

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