देहरादून/पिथौरागढ़। देवभूमि उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर बेहद खतरनाक रूप अख्तियार कर लिया है। राज्य के उत्तरकाशी और देहरादून सहित 6 जिलों में तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। सबसे ज्यादा खौफनाक मंजर सीमांत जिले पिथौरागढ़ में देखने को मिला, जहां आसमान से आफत के रूप में लगभग 250 ग्राम तक के बड़े-बड़े ओले गिरे हैं। मौसम के इस आक्रामक मिजाज को देखते हुए राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गए हैं और नागरिकों के बचाव के लिए मोबाइल पर ‘इमरजेंसी अलर्ट’ (Emergency Alert) भेजे जा रहे हैं।
पिथौरागढ़ में ओलावृष्टि से भारी तबाही
बीते कुछ घंटों में पिथौरागढ़ और इसके आस-पास के इलाकों में मौसम ने भारी तबाही मचाई है।
यहां बारिश के साथ-साथ भयंकर ओलावृष्टि हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, गिरे हुए ओलों का आकार इतना बड़ा था कि उनका वजन 200 से 250 ग्राम तक आंका जा रहा है।
इतने बड़े आकार के ओले गिरने से घरों की छतों (विशेषकर टिन शेड), खड़ी फसलों, फलों के बगीचों और खुले में खड़े वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है। गनीमत रही कि लोग समय रहते सुरक्षित स्थानों पर छिप गए, अन्यथा जनहानि हो सकती थी।
इन 6 जिलों में बारिश का कहर
मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में राज्य के उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो रही है। लगातार हो रही इस बारिश के कारण पहाड़ी नदी-नाले उफान पर आ गए हैं और कई जगहों पर भूस्खलन (Landslide) के कारण मार्ग बाधित होने की भी खबरें हैं।
सरकार ने मोबाइल पर भेजा ‘इमरजेंसी अलर्ट’
मौसम की गंभीरता और जान-माल के संभावित खतरे को देखते हुए उत्तराखंड सरकार के राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने त्वरित कार्रवाई की है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित और संवेदनशील जिलों के सभी मोबाइल उपयोगकर्ताओं के फोन पर एक ‘इमरजेंसी सायरन अलर्ट’ भेजा गया है।
इस बीप वाले फ्लैश मैसेज के जरिए लोगों को चेतावनी दी गई है कि वे खराब मौसम में बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।
प्रशासन की सख्त एडवाइजरी
लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन के खतरे के मद्देनजर प्रशासन ने स्थानीय लोगों, पर्यटकों और चारधाम यात्रियों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है:
जब तक मौसम साफ न हो जाए, तब तक पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने से बचें।
नदी-नालों और रपटों को पार करने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं।
कच्चे मकानों और जर्जर इमारतों से दूर रहें।
आकाशीय बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें।
सभी जिलाधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ (SDRF) तथा एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।

