नई दिल्ली । ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद Sambit Patra ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को गर्वपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने अदम्य साहस का परिचय दिया है।
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भाजपा सांसद Sambit Patra ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “यह प्रेस कॉन्फ्रेंस गर्व से भरा पल है। यह कोई साधारण प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं है। मैं भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में बैठा हूं, मुझे लगता है कि मैं सिर्फ पार्टी प्रवक्ता या सांसद के तौर पर नहीं, बल्कि एक भारतीय के तौर पर बोल रहा हूं।
पिछले कुछ दिनों में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को खत्म किया है, जो एक निर्णायक संदेश देता है। यह आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई का एक अहम हिस्सा है और इस मौके पर मुझे संबोधित करते हुए गर्व की अनुभूति हो रही है।”
Sambit Patra ने भारतीय सेना की तारीफ करते हुए कहा, “भारत की सेना ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। आज भाजपा और हम सभी कार्यकर्ता व पूरा भारत धन्यवाद करता है, भारत की सेना का, भारत की नेवी का, भारत की एयरफोर्स का और उन तमाम जांबाज सेनानियों का जिनके कारण ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सफल हुआ है।”
Sambit Patra ने आगे कहा, “22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में पाकिस्तान द्वारा प्रशिक्षित आतंकियों ने 26 लोगों की नृशंस हत्या कर दी थी। तब पीएम नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि आतंकवाद के खिलाफ हमला होगा, हम पहलगाम के इस आतंकवादी हमले का बदला लेंगे और ये जो बदला होगा, वो आतंकवादियों की कल्पना से बाहर का बदला होगा और जो बदला हमने लिया वो आतंकवादियों की सोच से परे था।”
भाजपा सांसद Sambit Patra ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब 20 देशों के राष्ट्राध्यक्षों से सीधे बात की। चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि पाकिस्तान को कैसे अलग-थलग किया जाए? आतंकवाद के खिलाफ कैसे लड़ा जाए? और सबसे महत्वपूर्ण बात, इन सभी देशों ने भारत के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। सऊदी अरब, यूएई, अमेरिका और विशेष रूप से सऊदी अरब और यूएई जैसे इस्लामी दुनिया के प्रमुख देशों ने भारत को अपना पूरा समर्थन दिया।”
Sambit Patra ऑपरेशन सिंदूर’ में सैन्य और गैर-सैन्य दोनों तरह की रणनीतियां शामिल
संबित पात्रा ने बताया, “’ऑपरेशन सिंदूर’ में सैन्य और गैर-सैन्य दोनों तरह की रणनीतियां शामिल हैं। गैर-सैन्य रणनीति के तहत, 1960 में स्थापित सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया गया। यह समझौता पाकिस्तान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसकी 80 प्रतिशत कृषि इस समझौते द्वारा नियंत्रित जल संसाधनों पर निर्भर है। जल प्रवाह को रोकने से पाकिस्तान के जीडीपी में एक-चौथाई की कमी आ सकती है। पानी और खून एक साथ नहीं बहेगा।”

