अंतरराष्ट्रीयराष्ट्रीयउत्तर प्रदेशउत्तराखंडपंजाबहरियाणाझारखण्डऑटोमोबाइलगैजेट्सखेलनौकरी और करियरमनोरंजनराशिफलव्यवसायअपराध

---Advertisement---

पटरियों के किनारे विंड टर्बाइन लगाने पर विचार कर रहा Railways, 2030 तक नेट-जीरो का लक्ष्य

On: January 15, 2025 12:18 PM
Follow Us:
---Advertisement---

वर्ष 2030 तक कार्बन उत्सर्जन का नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने के भारतीय Railways के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए रेल मंत्रालय पटरियों के किनारे पवन च​क्कियां लगाकर पवन ऊर्जा का लाभ उठाने पर विचार कर रहा है। मामले से अवगत लोगों ने इसकी जानकारी दी। इस मामले पर नवंबर में एक उच्च-स्तरीय बैठक में चर्चा की गई थी जिसमें रेलवे को इस तरह के कदम की व्यवहार्यता का पता लगाने के लिए कहा गया था। इसके लिए रेलवे ने पहले एक प्रायोगिक परियोजना भी शुरू की थी।
एक वरिष्ठ सरकारी अ​धिकारी ने बताया, ‘Railways अभी जोनल और अन्य सरकारी विभागों के साथ शुरुआती चरण का सलाह-मशविरा कर रहा है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर विंड टर्बाइन लगाकर इसकी व्यवहार्यता जांच की गई थी और बीते समय में प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ भी चर्चा की गई थी। आगे इस दिशा में और गंभीरता से विचार किया जाएगा।’

Railways ने उठाया बड़ा कदम, स्थापित करेगा बाल सहायता डेस्क

 

 

 

 

 

 

 

वर्ष 2023 में प​श्चिम रेलवे ने प्रायोगिक परियोजना के तौर पर रेल पटरियों के किनारे छोटी पवन च​क्कियां लगाई थीं। विंड टबाईन 1 से लेकर 10 किलोवाट बिजली पैदा करने में सक्षम होंगे। जोनल रेलवे ने ऐसे पांच ब्लेड लगाए हैं।
अक्षय ऊर्जा उत्पादन करने के लिए इस अवधारणा को अ​भिनव उपाय के तौर पर वैश्विक रेल प्रणाली में उपयोग किया गया है। मगर रेलवे के एक अधिकारी ने अनौपचारिक तौर पर कहा कि लॉजि​स्टिक संबंधी चिंताओं के कारण भारत में इसका विस्तार व्यापक स्तर पर नहीं किया जा सकता है। जब कोई ट्रेन 50-100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से छोटी पवन चक्कियों के किनारे से गुजरती है तो ब्लेड तांबे की प्लेटों और अन्य धातुओं से जुड़े रोटर शाफ्ट के माध्यम से हवा की गति के कारण घूमते हैं। जिससे बिजली पैदा होती है।
इस बारे में जानकारी के लिए रेल मंत्रालय को ईमेल भेजा गया और पश्चिम रेलवे के प्रवक्ता को कॉल किया गया मगर खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कई वजहों से यह परियोजना चालू नहीं हो पाई। पूर्व मध्य रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक ललित चंद्र त्रिवेदी ने कहा, ‘रेल पटरियां अक्सर ऐसे इलाकों में नहीं होती हैं जहां लगातार तेल हवाएं चलें जबकि तेज हवाएं टर्बाइन को चलाने के लिए अहम होती हैं।’

Aman Kumar Siddhu

He has 19 years of experience in journalism. Currently he is the Editor in Chief of Samar India Media Group. He lives in Amroha, Uttar Pradesh. For contact samarindia22@gmail.com

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Reply

error: Content is protected !!