Kerala राज्य का इतिहास है कि इस राज्य की विधानसभा पर बारी-बारी से कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ़ और माकपा के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा ने कब्जा किया है। पिछला विधानसभा चुनाव ही इसका अपवाद है, जब माकपा के मोर्चे ने लगातार दूसरी बार विजय प्राप्त की है। इसी प्रकार, लोकसभा चुनाव की सीटों का बंटवारा भी दोनों मोर्चों के बीच ही हुआ है। इसलिए यह माना जा सकता है कि केरल राज्य कांग्रेस और माकपा का गढ़ है। इनके बीच किसी तीसरे दल की उपस्थिति की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
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लेकिन आश्चर्यजनक ढंग से वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में केरल के त्रिशूर लोकसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी सुरेश गोपी ने विजय प्राप्त की थी। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा तीसरे स्थान पर थी। त्रिशूर लोकसभा क्षेत्र को माकपा का गढ़ माना जाता है।
इसलिए इस लोकसभा क्षेत्र से भाजपा की विजय को गोदी मीडिया द्वारा माकपा के गढ़ में भाजपा के सेंध के रूप में प्रचारित किया गया। उल्लेखनीय है कि इस लोकसभा चुनाव के दौरान ही माकपा की त्रिशूर जिला समिति के बैंक खाते को चुनाव आयोग द्वारा ब्लॉक कर दिया गया था। तब माकपा ने आरोप लगाया था कि भाजपा को जीताने के लिए ही चुनाव आयोग ने यह काम किया है, ताकि चुनाव प्रचार के लिए माकपा अपनी धनराशि का उपयोग न कर सके।
लेकिन राहुल गांधी द्वारा लोकसभा चुनाव के दौरान दक्षिण भारत के एक विधानसभा के अध्ययन के बाद वोट चोरी के जो प्रामाणिक आरोप चुनाव आयोग पर लगाए गए हैं, उसके बाद देश भर की मतदाता सूचियों के अध्ययन से जो चीजें निकलकर सामने आ रही हैं, वे आश्चर्यजनक है और इस बात की पुष्टि कर रहे है कि वोट चोरी का यह पैटर्न पूरे देश में अपनाया गया है। ‘द न्यूज मिनट’ ने भी त्रिशूर लोकसभा सीट का अध्ययन किया है। इसने रिपोर्ट से पता चलता है कि माकपा के बैंक खातों को ब्लॉक करने के साथ ही यहां भी फर्जी वोटिंग का यही पैटर्न अपनाया गया था।
‘द न्यूज़ मिनट’ की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि यहाँ पांच साल में 1.46 लाख मतदाता जोड़े गये और 2019 की चुनाव में तीसरे नंबर पर रहने वाले सुरेश गोपी को जितवाया गया। बीजेपी के नेताओं के कथित रिश्तेदार और खाली बिल्डिंग के पते पर लोगों के मतदाता कार्ड बनाये गये।
कमाल की बात यह है कि जिन लोगों को जोड़ा गया, उनमें से 99% लोग अब त्रिशूर में नहीं रहते। सुरेश गोपी के ड्राइवर अजय कुमार के पते पर ही दर्जनों वोट पड़े, जिनका कोई रिकार्ड अब नहीं है। इसी तरह हजारों वोट बीजेपी नेताओं, कार्यकर्ताओं के घर से पड़े, जिनका कोई रिकार्ड ढूढ़ने से नहीं मिल रहा है।
Kerala 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा तीसरे स्थान पर थी
सुरेश गोपी के रूप में भाजपा की विजय को चिन्हित करने के लिए अब उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री बना दिया गया है। तो यह है, Kerala में संघीयों के खाता खोलने का सच। लगता है कि अब किसी भी सीट की छानबीन कर ली जाएं, भाजपा की जीत में ऐसे ही फर्जीवाड़े उजागर होंगे। यह फर्जीवाड़ा भाजपा की जीत को अवैध बना देता है। भाजपा भले ही तीन-साढ़े तीन साल और सत्ता में रह लें, आम जनता की नजरों में अब उसका ऊपर चढ़ना मुश्किल है। वोट चोर, गद्दी छोड़ का विपक्ष का नारा एक मजबूत अर्थ ग्रहण करता जा रहा है।
लेखक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं। संपर्क : 9424231650

