बच्चों में बढ़ रहे हैं। रिकेट्स (सूखा रोग) के मामले, जानें इस बीमारी का कारण, लक्षण, बचाव के उपाय। डॉ. अमोल गुप्ता

कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद दुनिया भर के लोगों में तरह-तरह की बीमारियों के लक्षण देखे जा रहे हैं

बच्चों में बढ़ रहे हैं। रिकेट्स (सूखा रोग) के मामले, जानें इस बीमारी का कारण, लक्षण, बचाव के उपाय। डॉ. अमोल गुप्ता

बच्चों  के शरीर में विटामिन डी की कमी से रिकेट्स यानी सूखा रोग की गंभीर स्थिति पैदा होती है। एक्सपर्ट डॉक्टर अमोल गुप्ता से जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय।

रिपोर्ट – एस.पी सैनी।
सहसवान। कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद दुनिया भर के लोगों में तरह-तरह की बीमारियों के लक्षण देखे जा रहे हैं। मरीजों में पोस्ट कोविड लक्षण तेजी से उभर कर सामने आ रहे हैं। इसी बीच सहसवान स्थित डॉ रामनिवास गुप्ता हॉस्पिटल ने बयान जारी कर यह बताया है कि सहसवान में पिछले साल से ही रिकेट्स यानी सूखा रोग के मरीजों की संख्या बढ़ रही है हालांकि इस बीमारी का कोरोनावायरस संक्रमण से कोई संबंध नहीं देखा जा रहा है। सूखा रोग या रिकेट्स हड्डियों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है जो मुख्यतः शरीर में विटामिन डी की कमी से होती है। ये बीमारी ज्यादातर बच्चों में देखी जाती है जिनकी उम्र 2 से 14 साल की होती है। रिकेट्स या सूखा रोग की समस्या में बच्चों की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और इसकी वजह से हड्डियों या जोड़ों में दर्द समेत कई गंभीर समस्याएं हो सकती है। बच्चों में होने वाली रिकेट्स (Rickets) यानी सूखा रोग क्या है? इस बीमारी में कौन से लक्षण दिखते हैं और रिकेट्स का इलाज कैसे होता है? इन सवालों के बारे में डॉ रामनिवास गुप्ता हॉस्पिटल के डॉ अमोल गुप्ता ने जानकारी दी है। आइये विस्तार से जानते हैं सूखा रोग के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में।

 

रिकेट्स या सूखा रोग क्या है।
रिकेट्स या सूखा रोग बच्चों में होने वाली गंभीर बीमारी है जो विटामिन डी, कैल्शियम और फॉस्फोरस की कमी से होती है। इसके अलावा आनुवांशिक कारणों से भी बच्चों में रिकेट्स की बीमारी देखी जाती है। विटामिन डी शरीर में भोजन के जरिए कैल्शियम और फॉस्फोरस को अवशोषित करने में मदद करता है। ऐसे में शरीर में विटामिन डी की कमी होने से इन तत्वों की भी कमी हो जाती है। विटामिन डी, कैल्शियम और फॉस्फोरस की कमी से हड्डियां कमजोर होती हैं। जिसकी वजह से बच्चों में सूखा रोग हो जाता है। सिर्फ विटामिन डी की कमी से होने वाला सूखा रोग आसानी से ठीक हो जाता है लेकिन आनुवांशिक कारणों या शरीर की किसी अन्य समस्या से कारण होने वाले सूखा रोग या रिकेट्स की समस्या में इलाज की प्रक्रिया लंबी हो सकती है। रिकेट्स या सूखा रोग बच्चों में ज्यादातर होता है। लेकिन इसका उचित इलाज न होने पर वयस्क लोगों में भी इसके लक्षण बने रहते हैं। सूखा रोग की समस्या गंभीर होने पर मरीजों को सर्जरी की भी आवश्यकता पड़ सकती है। यह बीमारी लंबे समय से घर के अंदर रहने के कारण भी हो सकती है। जिन बच्चों के शरीर पर सूर्य की किरणें सही ढंग से नहीं पड़ती हैं। उनमें विटामिन डी की कमी का खतरा रहता है और इसकी वजह से उन्हें सूखा रोग या रिकेट्स हो सकता है। कुछ मामलों में कुपोषण के कारण भी बच्चों में रिकेट्स की समस्या देखने को मिलती है।
सूखा रोग या रिकेट्स के कारण
नवजात बच्चे को पोषण मां के दूध से मिलता है। लेकिन जब बच्चा 6 महीने का होता है तो उसे कॉम्प्लीमेंट्री फीडिंग की आवश्यकता होती है। बच्चों को उचित पोषण न मिलने के कारण उनके शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है जिसकी वजह से भोजन से कैल्शियम और फॉस्फोरस का अवशोषण सही तरीके से नहीं हो पाता है। इसकी वजह से बच्चों की हड्डियां कमजोर होती हैं और उन्हें सूखा रोग यानी रिकेट्स की समस्या होती है। शरीर में विटामिन डी की कमी, कुपोषण के अलावा रिकेट्स डिजीज के कई अन्य कारण भी हैं।

 

आइये जानते हैं। सूखा रोग या रिकेट्स की समस्या के प्रमुख कारणों के बारे में।
शरीर में विटामिन डी, कैल्शियम और फॉस्फोरस की कमी,सूरज की रोशनी न पड़ने की वजह से,सीलिएक डिजीज के कारण रिकेट्स की बीमारी,किडनी से जुड़ी समस्याओं के कारण रिकेट्स,वायु प्रदूषण के उच्च स्तर वाले स्थान पर रहने के कारण,आनुवांशिक कारणों से सूखा रोग।
शरीर में मेटाबोलिज्म से जुड़ी समस्या से कारण,सूखा रोग या रिकेट्स के जोखिम कुछ बच्चों में जन्म के समय से ही सूखा रोग यानी रिकेट्स का जोखिम रहता है। बच्चों में रिकेट्स या सूखा रोग होने के प्रमुख जोखिम कारक इस प्रकार से हैं।
डार्क स्किन की वजह से बच्चों में रिकेट्स का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्किन वाले बच्चों में मेलेनिन की वजह से सूरज की रोशनी से विटामिन डी का उत्पादन कम होता है। इसकी वजह से विटामिन डी की कमी होती है और सूखा रोग का खतरा बढ़ता है।

 

प्रेग्नेंसी के दौरान मां के शरीर में विटामिन डी की कमी होने से बच्चों में रिकेट्स या सूखा रोग का जोखिम बढ़ जाता है। कई बार जन्म से ही बच्चों में सूखा रोग की समस्या होती है या जन्म के कुछ समय बाद बच्चे इस गंभीर समस्या का शिकार हो जाते हैं। प्रीमैच्योर डिलीवरी यानी समय से पहले बच्चे का जन्म होने से भी बच्चों में रिकेट्स या सूखा रोग का खतरा बढ़ता है।
खराब पोषण के कारण बच्चों में सूखा रोग होने का खतरा। एचआईवी संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली एंटीरेट्रोवायरल और अन्य दवाओं के सेवन के कारण भी बच्चों में रिकेट्स का जोखिम बढ़ता है।ऐसे भौगोलिक स्थान जहां पर धूप कम होती है वहां के बच्चों में रिकेट्स का खतरा अधिक होता है।

 

रिकेट्स या सूखा रोग के लक्षण
रिकेट्स या सूखा रोग से ग्रसित होने पर बच्चों में हड्डी से जुड़ी कई समस्याएं होती हैं। सूखा रोग के कारण बच्चों को हड्डियों की कमजोरी घुटने और पैर का मुड़ना जैसे कई गंभीर लक्षण देखने को मिलते हैं। रिकेट्स या सूखा रोग से ग्रसित होने पर बच्चों में दिखने वाले प्रमुख लक्षण इस प्रकार से हैं।
हड्डियों में कमजोरी होना,हड्डियों का टेढ़ापन,बच्चों के विकास में समस्या,रीढ़ और पैरों की हड्डियों में दर्द,मांसपेशियों का कमजोर होना।
ब्रेस्टबोन प्रोजेक्शन,हड्डियों का आसानी से टूट जाना,कोहनी और कलाई के चौड़े जोड़,दिव्यांगता की समस्या।
सूखा रोग यानी रिकेट्स का इलाज
सूखा रोग से ग्रसित बच्चों के इलाज के लिए चिकित्सक शरीर में कैल्शियम, फॉस्फोरस और विटामिन डी की मात्रा बढ़ाने के लिए दवाएं देते हैं। इसके अलावा सूरज की रोशनी के संपर्क को बढ़ाने की सलाह भी दी जाती है। बच्चों के डाइट में विटामिन डी समेत कैल्शियम और फॉस्फोरस की मात्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सामान्य रूप से इस बीमारी को कुछ दवाओं के सेवन और डाइट से ठीक किया जा सकता है। जिन बच्चों में गंभीर समस्याएं होती हैं उन्हें इलाज के साथ सर्जरी की भी आवश्यकता पड़ सकती है।
विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थ एवं प्राकृतिक स्रोत

 


1- धूप- विटामिन डी का सबसे अच्छा और प्राकृति स्रोत धूप है. धूप से शरीर को भरपूर विटामिन डी मिलता है. विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए आपको रोज सुबह थोड़ी देर धूप में जरूर बैठना चाहिए. 2- अंडा- अंडे में पोषक तत्वों का भंडार होता है। अंडे की जर्दी में विटामिन डी भी पाया जाता है. विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए आप रोज एक अंडे की जर्दी खाएं. 3- गाय का दूध- गाय के दूध में काफी मात्रा में विटामिन डी पाया जाता है। कैल्शियम और विटामिन डी का बेस्ट सोर्स है दूध. अगर आप 1 गिलास गाय के दूध पीते हैं। तो इसके पर्याप्त विटामिन डी मिल जाता है. 4- दही- खाने में दही जरूर शामिल करें। दही के सेवन से आप विटामिन डी की कमी को पूरा कर सकते हैं। गर्मियों में दही पेट को भी फिट रखती है। 5- मशरूम- मशरूम में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। विटामिन सी, विटामिन बी1, बी2, बी5 और मैग्नेशियम का अच्छा स्रोत है मशरुम. मशरूम में विटामिन डी भी काफी मात्रा में पाया जाता है. 6- फिश- नॉन वेज खाने वाले लोगों के लिए मछली विटामिन डी का अच्छा स्रोत है. आप हेरिंग, मैकेरल, सैल्मन और टूना जैसी फिश से विटामिन डी की कमी पूरा कर सकते हैं। 7- संतरा- विटामिन डी की डेली नीड्स को पूरा करने के लिए आप संतरा भी खा सकते हैं. संतरे में पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी पाया जाता है. आप संतरे का जूस भी पी सकते हैं. इससे आपको विटामिन सी भी मिलेगा. 8- अनाज- खाने में साबुत अनाज भी शामिल करने चाहिए. गेंहू, जौ और दूसरे अनाज में विटामिन डी पाया जाता है। आपके शरीर को अनाज से भी विटामिन डी मिलता है। 9 – ओट्स- ओट्स में भी विटामिन डी पाया जाता है। आप अपनी डाइट में ओट्स जरूर शामिल करें. ओट्स फाइबर से भरपूर होता है। जिससे पाचन भी अच्छा रहता है। 10- मीट- मांसाहारी लोगों के पास विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए फिश के अलावा मीट भी अच्छा सोर्स है. कार्डलीवर ऑइल में भी काफी मात्रा में विटामिन डी पाया जाता है।

 


सूखा रोग से बचाव कैसे करें?
बच्चों में सूखा रोग से बचाव के लिए उनके खानपान का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को विटामिन डी की कमी होने पर नियमित रूप से विटामिन डी, कैल्शियम और फॉस्फोरस की खुराक का सेवन जरूर करना चाहिए।गर्भवती महिलाओं को प्रातः काल घर की छत पर या पार्क में उगते हुए सूर्य का ध्यान तथा गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित योगासन व प्राणायाम करना चाहिए । सूर्य नमस्कार सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए एक उत्तम व्यायाम है।
इसके अलावा बच्चे को रोजाना तकरीबन 10 से 15 मिनट तक धूप के संपर्क में जरूर आना चाहिए; बच्चों को आउटडोर गेम्स खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। रिकेट्स के जोखिम या लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क जरूर करें।

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