संभल/मुरादाबाद, 23 मई। प्रदेश के लाखों लोगों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। राज्य सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ के पहले चरण यानी मेरठ से बदायूं तक फर्राटा भरने का रास्ता और खर्च दोनों साफ हो गए हैं। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत डिजाइन, निर्माण, वित्त पोषण, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल पर तैयार हुए इस 129.7 किलोमीटर लंबे एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए वर्ष 2026-27 की टोल दरें आधिकारिक तौर पर तय कर दी गई हैं।
नई दरों के मुताबिक, मेरठ के बिजौली से बदायूं के नगला बारह तक का पूरा सफर करने वाले कार चालकों को एक तरफ के लिए 435 रुपये चुकाने होंगे। यह खबर सिर्फ एक टोल की जानकारी नहीं है, बल्कि पश्चिमी यूपी से रुहेलखंड तक व्यापार, समय की बचत और विकास की एक नई रफ्तार की शुरुआत का संकेत है। बता दें कि मेरठ से बदायूं के बीच कुल चार जिले पड़ते है, जिसमें हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा व संभल शामिल है।
किस वाहन को देना होगा कितना टोल
इस लंबे सफर के लिए सरकार और यूपीडा ने अलग-अलग वाहनों के लिए टोल की दरें बड़ी बारीकी से तय की हैं। कार, जीप या हल्के मोटर वाहनों के लिए 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर का बेस रेट रखा गया है। इसके आधार पर पूरी यात्रा के लिए कार का एकतरफा टोल 435 रुपये और 24 घंटे के भीतर वापसी करने पर 695 रुपये लगेगा। इसी तरह हल्के कमर्शियल वाहनों और मिनी बसों को एक तरफ के लिए 685 रुपये, जबकि भारी ट्रकों और बसों को 1375 रुपये देने होंगे। भारी निर्माण मशीनों (जैसे जेसीबी) के लिए 2105 रुपये और बड़े ट्रेलरों (सात या अधिक एक्सल) के लिए 2715 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है।
रोजाना सफर करने वालों के लिए 20 ट्रिप पास की सुविधा
एक्सप्रेसवे पर व्यापार या नौकरी के सिलसिले में नियमित यात्रा करने वालों को हर दिन पर्ची कटाने के झंझट से मुक्ति दी गई है। यूपीडा ने 20 एकतरफा यात्राओं (वन-वे ट्रिप) के लिए एकमुश्त पास की सुविधा दी है। मेरठ से बदायूं तक की पूरी दूरी के लिए कार/जीप चालकों को इस पास के लिए 6,970 रुपये चुकाने होंगे। इसी तरह, हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए यह पास 10,940 रुपये, बस/ट्रक के लिए 22,035 रुपये, भारी निर्माण मशीनों के लिए 33,645 रुपये और ओवरसाइज्ड ट्रेलरों के लिए 43,425 रुपये में बनेगा। दोपहिया, तिपहिया और ट्रैक्टर के लिए यह पास 3,485 रुपये का होगा।
50 करोड़ से महंगे पुलों का भी लगा है चार्ज
इस एक्सप्रेसवे की टोल दरों में केवल सड़क पर चलने का ही खर्च शामिल नहीं है, बल्कि रास्ते में पड़ने वाले बड़े ढांचों का भी शुल्क जोड़ा गया है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, 50 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बने किसी भी स्थायी पुल, इंटरचेंज या सुरंग के इस्तेमाल पर अतिरिक्त फीस लगती है। मेरठ से बदायूं के इस 129.7 किलोमीटर के रूट पर ऐसे तीन बड़े पुल आते हैं। इनमें 69.309 करोड़ रुपये, 299.960 करोड़ रुपये और 60.056 करोड़ रुपये की भारी लागत से बने ढांचे शामिल हैं। इन पुलों को बनाने और इनके रखरखाव में आई भारी लागत का एक हिस्सा भी टोल के रूप में यात्रियों से वसूला जाएगा।
पीपीपी मॉडल से बदल रही प्रदेश की तस्वीर
यह पूरी परियोजना उत्तर प्रदेश सरकार की दूरगामी सोच और कार्ययोजना का बेहतरीन उदाहरण है। एक्सप्रेसवे के इस ग्रुप-1 का निर्माण मेसर्स मेरठ बदायूं एक्सप्रेसवे लिमिटेड द्वारा पीपीपी मॉडल के आधार पर किया गया है। टोल वसूली के लिए पूरे रास्ते में नौ टोल प्लाजा की व्यवस्था की गई है, जिससे यात्रा सुगम और पारदर्शी बनेगी।
वर्जन
टोल दरों का यह निर्धारण यूपीडा की स्वीकृति के बाद किया गया है। प्रशासन अब इन दरों को नियमपूर्वक लागू कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। प्रशासन की ओर से पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी और यात्रियों की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
– अंकित खंडेलवाल, जिलाधिकारी, संभल
–

