दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। वर्ष 2026 में दीपावली रविवार, 8 नवंबर को मनाई जा रही है। लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 बजे तक है, जो प्रदोष काल और वृषभ लग्न में पड़ रहा है। इस समय में की गई पूजा से घर में सुख-समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है। यहां जानिए पूजन की संपूर्ण विधि।
पूजा सामग्री की सूची
पूजा के लिए मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर, लाल कपड़ा, कलश, गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), रोली, चावल, फूल, माला, धूप, दीपक, कपूर, नैवेद्य, मिठाई, फल, पान-सुपारी, सिक्के, कौड़ी, कमल का फूल, बही-खाता और नई झाड़ू रखें। पूजा स्थल को पहले साफ करके गंगाजल छिड़कें और रंगोली बनाएं।
पूजन की संपूर्ण विधि
सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर लाल कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें। कलश में जल भरकर आम के पत्ते और नारियल रखें। सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें, फिर मां लक्ष्मी का। देवी को पंचामृत से स्नान कराएं, फिर रोली-चावल लगाकर फूल-माला अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर नैवेद्य और मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद बही-खाते, धन और तिजोरी की भी पूजा करें। अंत में मां लक्ष्मी की आरती करें और घर के हर कोने में दीया जलाएं।
लक्ष्मी पूजन के मंत्र
पूजा के दौरान “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें। गणेश जी के लिए “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें। मंत्र जाप के बाद “ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्” का पाठ भी शुभ माना जाता है। पूजा के बाद प्रसाद बांटें और बड़ों का आशीर्वाद लें।
दीपदान और आरती
पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार, तुलसी, रसोई और आंगन में दीये जलाएं। मां लक्ष्मी की आरती “ॐ जय लक्ष्मी माता” गाकर करें। दीपावली की रात घर को रोशनी से सजाना मां लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक माना जाता है। अयोध्या दीपोत्सव के शुभारंभ की खबर यहां पढ़ें
पूजा में मन की शुद्धता सबसे जरूरी है। मुहूर्त शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए अपने शहर का स्थानीय पंचांग जरूर देखें। दिवाली पर सुरक्षा व्यवस्था की खबर यहां पढ़ें

