राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड पुलिस को नई पहचान दी है। देहरादून में मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित समारोह में पुलिस के नए ध्वज, प्रतीक चिह्न, इंसिग्निया, क्रेस्ट और सेरेमोनियल वर्दी का अनावरण किया गया।
नया आदर्श वाक्य: कर्म सत्यम शौर्यम
इस रीब्रांडिंग का केंद्रबिंदु नया मंत्र है — ‘कर्म सत्यम शौर्यम’, यानी ‘कर्तव्य, सत्य, साहस’। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह वाक्य सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि पुलिस के व्यवहार के लिए एक दिशानिर्देश है। नई पहचान का मकसद पुलिस बल को अनुशासित, जनसेवी और भरोसेमंद बनाना है।
दो अधिकारियों का सम्मान
समारोह में दो अधिकारियों — शाहजहां जावेद खान और जगदीश चंद्रा — का भी सम्मान किया गया, जिन्हें उत्तराखंड पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में पदोन्नत किया गया है। दोनों को नए प्रतीक चिह्न से सुशोभित किया गया।
धामी सरकार की ₹328 करोड़ की दिवाली सौगात
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 का भी शुभारंभ किया, जिसका विषय है — ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’। धामी ने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति है और नागरिक शिकायतों के लिए समर्पित हेल्पलाइन नंबर 1064 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
पुलिस सुधार की दिशा में कदम
उत्तराखंड पुलिस की स्थापना 2000 में राज्य गठन के साथ हुई थी, लेकिन अब तक इसका अपना विशिष्ट ध्वज और प्रतीक चिह्न नहीं था। नई पहचान के साथ पुलिस थानों, वाहनों और वर्दी पर एकसमान प्रतीक दिखेंगे। जानकारों का मानना है कि प्रतीकों के साथ-साथ अगर प्रशिक्षण और जनसंवाद में भी सुधार हो, तो पुलिस की छवि और मजबूत होगी।
राष्ट्रीय एकता दिवस — 31 अक्टूबर — भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर 2014 से मनाया जाता है। इसी दिन पुलिस की नई पहचान का अनावरण करने को मुख्यमंत्री ने जानबूझकर चुना, ताकि एकता और अखंडता के संदेश के साथ पुलिस बल के सुधार का संकल्प भी जुड़े।
महक क्रांति: 7 एरोमा वैली से किसानों की आय बढ़ेगी

