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चम्पावत :  CM धामी ने किए माँ वाराही के दर्शन, दी ये बड़ी सौगातें

On: August 28, 2026 7:40 PM
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चम्पावत: देवभूमि उत्तराखंड अपनी अगाध आस्था, समृद्ध लोक-संस्कृति और अनूठी परंपराओं के लिए विश्व विख्यात है। इसका जीवंत उदाहरण रक्षाबंधन के पावन अवसर पर चम्पावत के देवीधुरा स्थित माँ वाराही धाम में देखने को मिला। यहां आयोजित विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बग्वाल मेले में आस्था, संस्कृति और उत्साह का अद्भुत संगम नजर आया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस भव्य मेले में प्रतिभाग कर प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की।

छोलिया नृत्य से स्वागत, मातृशक्ति ने बांधी राखी

देवीधुरा हेलीपैड पर पहुंचने पर मुख्यमंत्री का पारंपरिक लोकनृत्य ‘छोलिया’ की मनमोहक प्रस्तुति के साथ भव्य स्वागत किया गया।

  • मुख्यमंत्री ने शक्तिपीठ माँ वाराही देवी की विधिवत पूजा-अर्चना की।

  • रक्षाबंधन के पावन अवसर पर मेले में उपस्थित बालिकाओं एवं महिलाओं ने मुख्यमंत्री को राखी बांधकर त्योहार मनाया।

  • सीएम ने प्रदेशवासियों से अपनी लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता का आह्वान करते हुए ‘विकास भी और विरासत भी’ का संकल्प दोहराया।

देवीधुरा के लिए CM धामी की बड़ी घोषणाएं

मुख्यमंत्री ने विकास को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने पर जोर देते हुए देवीधुरा के लिए कई महत्वपूर्ण ऐलान किए:

  • नगर पंचायत: देवीधुरा के विकास को गति देने के लिए इसे ‘नगर पंचायत’ का दर्जा दिया जाएगा।

  • मल्टी लेवल पार्किंग: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए देवीधुरा में ₹9.80 करोड़ की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण शीघ्र शुरू होगा।

  • मानसखंड मंदिर माला मिशन: सीएम ने बताया कि कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख पौराणिक स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में 397 कार्यों पर ₹68.58 करोड़ खर्च किए गए हैं।

चार खामों के बीच खेला गया ऐतिहासिक ‘बग्वाल’

माँ वाराही मंदिर में प्रधान पुजारी की पूजा-अर्चना के बाद ऐतिहासिक बग्वाल (पाषाण युद्ध) की शुरुआत हुई।

  • चार खामों का प्रवेश: चारों खाम—वालिक (सफेद पगड़ी), चम्याल (गुलाबी), गहड़वाल (भगवा) और लमगड़िया (पीली पगड़ी) के वीर (बग्वाली) पूरे उत्साह के साथ मैदान में उतरे।

  • फलों-फूलों की बरसात: बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से निर्मित ढालें थीं। शंखनाद और माँ वाराही के जयकारों के बीच फलों और फूलों की जमकर बरसात हुई।

  • भाईचारे की मिसाल: मुख्यमंत्री ने इस अनोखी परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि यह खेल अनुशासन और भाईचारे की मिसाल है, जहां बग्वाल खत्म होने के बाद सभी योद्धा एक-दूसरे के गले मिलते हैं।

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