बदायूं पुलिस की निगरानी फेल! 15 दिनों में दो मामलों ने खोली पोल, थाना प्रभारियों की भूमिका जांच में उलझी
बदायूं।थानों में पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगने के बाद कार्रवाई सिपाही और दरोगा तक पहुंच रही है,लेकिन थाना प्रभारी की जिम्मेदारी तय करने में विभागीय जांच का इंतजार किया जा रहा है।पिछले 15 दिनों में जरीफनगर और इस्लामनगर में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाले दो मामले सामने आए हैं।जरीफनगर में अवैध दबिश,परिवार से अभद्रता और तीन लोगों को अवैध कस्टडी में रखने के आरोप में दरोगा समेत पांच पुलिसकर्मी निलंबित किए गए।वहीं इस्लामनगर में अफीम के साथ पकड़े गए तीन लोगों को रकम लेकर छोड़ने के आरोप में चार सिपाहियों पर कार्रवाई हुई।
दोनों मामलों में थाना प्रभारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है।जरीफनगर में थाना प्रभारी बाबूराम गौतम से स्पष्टीकरण लिया गया है,जबकि इस्लामनगर में थाना प्रभारी धनंजय सिंह की भूमिका को लेकर जांच चल रही है। कार्रवाई झेल चुके पुलिसकर्मियों की भूमिका पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन थाना स्तर पर निगरानी और जिम्मेदारी तय होने का फैसला अभी जांच रिपोर्ट पर टिका है।
जरीफनगर में दूसरे चौकी क्षेत्र में दबिश का मामला:-जरीफनगर में 7 सितंबर की रात बस्तोई सीकरी चौकी प्रभारी मनीष भारद्वाज पुलिसकर्मियों के साथ दूसरे चौकी क्षेत्र के दियोहरा शेखपुर गांव में दबिश देने पहुंचे थे। आरोप था कि एनडीपीएस के मामले में वांछित व्यक्ति के घर दबिश के बाद उसके परिवार के लोगों के साथ अभद्रता और मारपीट की गई।शिकायत सामने आने के बाद एसएसपी अंकिता शर्मा ने चौकी प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था।इसके बाद एक अन्य सिपाही रॉबिन शर्मा को भी लाइन हाजिर किया गया।मामले की विभागीय जांच एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह को सौंपी गई।जांच के दौरान जरीफनगर थाना प्रभारी बाबूराम गौतम की भूमिका को लेकर भी उनसे स्पष्टीकरण लिया गया।अब विभागीय जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट एसएसपी को भेजी जानी है। ऐसे में कार्रवाई झेल चुके पुलिसकर्मियों की भूमिका तो जांच के बाद सामने आ गई, लेकिन थाना प्रभारी की जिम्मेदारी पर फैसला अभी होना बाकी है।
इस्लामनगर में अफीम के साथ पकड़े लोगों को छोड़ने का आरोप:-इसी बीच इस्लामनगर में पुलिस पर इससे भी गंभीर आरोप सामने आए। आरोप है कि पुलिस ने तीन लोगों को अफीम के साथ पकड़ा था और बाद में मोटी रकम लेकर उन्हें छोड़ दिया।इस मामले में चार सिपाहियों पर कार्रवाई की गई हैहालांकि, थाना प्रभारी धनंजय सिंह की भूमिका को लेकर स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।दोनों मामलों ने थानों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया है।अगर थाना क्षेत्र में तैनात पुलिसकर्मी दूसरे इलाके में दबिश दे रहे थे,परिवार से अभद्रता और मारपीट की शिकायत सामने आई और थाना स्तर पर इसकी जानकारी नहीं हुई तो निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी, यह सवाल उठ रहा है।इसी तरह तीन लोगों को मादक पदार्थ के साथ पकड़ने और बाद में उन्हें छोड़ने जैसी गंभीर घटना में थाना प्रभारी को इसकी जानकारी थी या नहीं, यह भी जांच का अहम बिंदु है।पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होने के बाद अब थाना स्तर पर पर्यवेक्षण और जिम्मेदारी तय होने पर नजर है।
कार्रवाई पर टिकी नजर:-फिलहाल दोनों मामलों में सिपाही और दरोगा कार्रवाई झेल चुके हैं।जरीफनगर में बाबूराम गौतम और इस्लामनगर में धनंजय सिंह की भूमिका जांच के बाद ही साफ होगी।ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभागीय कार्रवाई केवल सीधे आरोपों का सामना कर रहे पुलिसकर्मियों तक सीमित रहती है या थाना स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी भी तय की जाती है।दोनों मामलों की जांच एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह कर रहे हैं।एसपी सिटी ने बताया कि जांच जारी है।जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा,उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।रिपोर्ट-जयकिशन सैनी

