अंतरराष्ट्रीयराष्ट्रीयउत्तर प्रदेशउत्तराखंडपंजाबहरियाणाझारखण्डऑटोमोबाइलगैजेट्सखेलनौकरी और करियरमनोरंजनराशिफलव्यवसायअपराध

---Advertisement---

युवा आइकॉन Dr. Chinmay Pandya ने रोम में किया हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व

On: June 20, 2025 10:00 PM
Follow Us:
Dr. Chinmay Pandya
---Advertisement---

हरिद्वार। हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज के प्रतिकुलपति युवा आइकॉन Dr. Chinmay Pandya ने इटली की राजधानी रोम में आयोजित सेकण्ड पार्लियामेंटरी कॉन्फ्रेन्स ऑन इंटरफेथ डायलॉग में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वे हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र भारतीय थे।

युवा जागरण शिविर शुरूः समाज की रीढ़ की तरह होता है युवा : Dr Chinmay Pandya

इस वैश्विक सम्मेलन का आयोजन इटैलियन पार्लियामेंट, इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन तथा रिलिजन्स फॉर पीस के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें 120 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों, सांसदों, मंत्रियों एवं धार्मिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। शांतिकुंज द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार इस सम्मेलन का विषय था- भविष्य के लिए विश्वास को सशक्त बनाना एवं आशा को अपनाना।

इस वैश्विक मंच पर हिंदू धर्म के प्रतिनिधित्व करने के लिए भारतीय संस्कृति संवाहक के रूप में एकमात्र भारतीय युवा आइकॉन Dr. Chinmay Pandya को आमंत्रित किया गया था। उन्होंने अपने उद्बोधन में भारतीय संस्कृति की शाश्वत शिक्षाओं को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करते हुए शिक्षा के माध्यम से शांति की आवश्यकता पर जोर दिया।

देसंविवि के प्रतिकुलपति युवा आइकॉन डॉ. पंड्या ने बताया कि भारतीय परंपरा में शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना प्राप्त करना नहीं, बल्कि ईमानदारी, समझदारी, जिम्मेदारी, करुणा और आत्मिक गरिमा का विकास करना है। उन्होंने युगऋषि पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्यश्री एवं परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के विचारों और उनके मानवता पर केंद्रित दृष्टिकोण को विस्तार से अवगत कराया। जिसे उपस्थित महानुभावों ने अत्यंत सराहनीय बताया।

Dr. Chinmay Pandya ने इटली की राजधानी रोम में आयोजित सेकण्ड पार्लियामेंटरी कॉन्फ्रेन्स ऑन इंटरफेथ डायलॉग में भारत का प्रतिनिधित्व किया

इस सम्मेलन में Dr. Chinmay Pandya की सहभागिता ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को विश्वपटल पर गरिमा के साथ प्रस्तुत किया और वैश्विक शांति, समन्वय एवं संवाद के लिए हिंदू दृष्टिकोण को सशक्त रूप में सामने रखा। इसे वैश्विक स्तर पर माता भगवती देवी शर्मा जी की जन्मशताब्दी के अभियानों के साथ ही भारतीय संस्कृति के विस्तार पर एक सार्थक पहल के रूप में माना जा सकता है।

 

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Reply

error: Content is protected !!