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cm-dhami ने स्व. रणजीत सिंह वर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राज्य निर्माण आंदोलन में उनके महत्वपूर्ण योगदान का स्मरण किया।

On: November 5, 2026 7:16 PM
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cm-dhami ने स्व. रणजीत सिंह वर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित
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cm-dhami ने  आईआरडीटी सभागार, सर्वे चौक, देहरादून में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के अग्रणी सेनानी एवं जननायक स्व. रणजीत सिंह वर्मा के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘रणजीत सिंह वर्मा : उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन की निर्णायक लड़ाई के एक जननायक’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्व. रणजीत सिंह वर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राज्य निर्माण आंदोलन में उनके महत्वपूर्ण योगदान का स्मरण किया।
cm-dhami ने पुस्तक के माध्यम से स्व. रणजीत सिंह वर्मा के जीवन, संघर्ष और राज्य निर्माण में उनके योगदान को संजोने के लिए वरिष्ठ साहित्यकार श्री गंभीर सिंह पालनी एवं श्री अजय वर्मा के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल एक जननायक की जीवनगाथा नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के संघर्ष और संकल्प का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इससे आने वाली पीढ़ियों को राज्य निर्माण के इतिहास और आंदोलनकारियों के त्याग एवं बलिदान की जानकारी मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण दशकों के संघर्ष और असंख्य आंदोलनकारियों के त्याग एवं बलिदान का परिणाम है। पृथक राज्य की स्थापना लाखों लोगों की आकांक्षाओं और जनभावनाओं की जीत थी। स्व. रणजीत सिंह वर्मा ने पृथक उत्तराखण्ड की मांग को बुलंद करने, लोगों को एकजुट करने और आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
cm-dhami ने कहा कि स्व. रणजीत सिंह वर्मा ने उत्तराखण्ड संयुक्त संघर्ष समिति के देहरादून जनपद अध्यक्ष के रूप में विभिन्न संगठनों और आंदोलनकारियों को एक मंच पर लाकर आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया। वर्ष 1995-96 और उसके बाद भी उन्होंने देहरादून में आंदोलन को सक्रिय बनाए रखा। बंद, चक्का जाम, जेल भरो और रेल रोको जैसे आंदोलनों का नेतृत्व कर उन्होंने पृथक राज्य की मांग को मजबूती दी। उन्होंने डोईवाला के प्रेमनगर बाजार स्थित अपनी ससुराल को भी आंदोलन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया और पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले आंदोलनकारियों के ठहरने की व्यवस्था में सहयोग किया।
cm-dhami ने खटीमा, मसूरी और मुजफ्फरनगर की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये राज्य आंदोलन के इतिहास के अत्यंत पीड़ादायक अध्याय हैं। अनेक कठिनाइयों और यातनाओं के बावजूद आंदोलनकारियों ने अपना संघर्ष जारी रखा। उनके संघर्ष और बलिदान के फलस्वरूप 9 नवम्बर 2000 को उत्तराखण्ड देश के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. रणजीत सिंह वर्मा अविभाजित उत्तर प्रदेश की मसूरी विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे, लेकिन उन्होंने राज्य निर्माण के संकल्प को सर्वोपरि रखा। राज्य गठन के बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। उनका जीवन सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता और निःस्वार्थ जनसेवा की प्रेरणा देता है।
cm-dhami ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के साथ ही उनके सपनों को साकार करना हम सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार प्रदेश के समग्र विकास, सुशासन, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हमारा संकल्प ऐसा उत्तराखण्ड बनाना है, जहां युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलें, मातृशक्ति आत्मनिर्भर बने और विकास का लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे।
cm-dhamiने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप विकसित और समृद्ध उत्तराखण्ड का निर्माण ही स्व. रणजीत सिंह वर्मा और राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले सभी आंदोलनकारियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने राज्य आंदोलन के सभी शहीदों को नमन करते हुए समस्त आंदोलनकारियों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, हंस फाउंडेशन की संस्थापक माता मंगला, वरिष्ठ साहित्यकार श्री गंभीर सिंह पालनी, श्री अजय वर्मा सहित राज्य आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधिगण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

Aman Kumar Siddhu

He has 19 years of experience in journalism. Currently he is the Editor in Chief of Samar India Media Group. He lives in Amroha, Uttar Pradesh. For contact samarindia22@gmail.com

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