तैयारियां तेज
उत्तराखंड में नवंबर माह में प्रस्तावित चाय महोत्सव के आयोजन की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसके साथ ही प्रदेश में शहद नीति भी जारी की जाएगी। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने शनिवार को विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर महोत्सव की तैयारियों और अन्य योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।
अधिकारियों को निर्देश
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को चाय महोत्सव से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं निर्धारित समय में पूरी करने के निर्देश दिए। बैठक में शहद नीति जारी करने और मुख्यमंत्री समृद्धि योजना को लेकर भी चर्चा की गई। प्रदेश सरकार कृषि और बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई योजनाएं ला रही है।
चाय और शहद पर फोकस
उत्तराखंड में चाय की खेती और मधुमक्खी पालन किसानों के लिए आय का बड़ा स्रोत बनता जा रहा है। चाय महोत्सव के जरिए राज्य की चाय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने का लक्ष्य है। वहीं शहद नीति से मधुमक्खी पालकों को प्रशिक्षण, अनुदान और बाजार तक पहुंच की सुविधा मिलने की उम्मीद है। प्रदेश में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए पहले से चल रही योजनाओं के साथ नई शहद नीति से किसानों को दोहरा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री समृद्धि योजना की प्रगति पर भी चर्चा हुई, जिसके तहत किसानों को विभिन्न कृषि गतिविधियों के लिए सहायता दी जाती है। चाय महोत्सव में राज्य की विभिन्न चाय बागानों की चाय प्रदर्शित की जाएगी और चाय पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना है। उत्तराखंड की चाय को जैविक और प्रीमियम श्रेणी में पहचान मिल रही है, जिसे महोत्सव के जरिए और आगे बढ़ाया जाएगा।
राज्य सरकार की कृषि योजनाओं को बढ़ावा देने वाली यह पहल 7 अरोमा वैली योजना जैसी परियोजनाओं के साथ मिलकर प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। किसानों के हितों से जुड़े फैसले सरकारी योजनाओं के जरिए लगातार लिए जा रहे हैं।

