5 नवंबर को कपाट बंद
पिथौरागढ़ जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित पवित्र आदि कैलाश मंदिर के कपाट आगामी 5 नवंबर 2026 को पूरे विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। कपाट बंद करने का यह महत्वपूर्ण निर्णय धारचूला तहसील के सीमांत गांव कुटी में आयोजित एक बैठक के दौरान सर्वसम्मति से लिया गया।
रिकॉर्ड श्रद्धालु पहुंचे
इस वर्ष आदि कैलाश की यात्रा पर आए श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड 71 हजार तक पहुंच गई है, जो इस क्षेत्र के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। कपाट बंद होने के साथ ही इस वर्ष की आधिकारिक धार्मिक यात्रा का सत्र संपन्न हो जाएगा।
आदि कैलाश का महत्व
आदि कैलाश को पंच कैलाशों में से एक माना जाता है और यह हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र स्थल है। ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां की यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट अनिवार्य होता है, क्योंकि यह क्षेत्र भारत-तिब्बत सीमा के निकट पड़ता है। हर साल हजारों श्रद्धालु और ट्रेकर्स यहां पहुंचते हैं। इस साल 71 हजार का रिकॉर्ड आंकड़ा क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन के बढ़ते रुझान को दर्शाता है।
आगे की व्यवस्था
अब उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी की ओर से अग्रिम इनर लाइन परमिट (ILP) जारी करने पर आधिकारिक रोक लगाने के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। कपाट बंद होने के बाद यह क्षेत्र अगले सीजन के लिए पुनः खुलने तक शीतकालीन बर्फबारी के साए में रहेगा। कपाट बंद होने के बाद आदि कैलाश क्षेत्र में धार्मिक यात्रा पूरी तरह रुक जाएगी और प्रशासन की ओर से यात्रा मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी जाएगी, ताकि शीतकाल में कोई श्रद्धालु जोखिम भरे रास्तों पर न जाए।
चारधाम भी अंतिम चरण में
गौरतलब है कि उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा भी अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। नवंबर माह में चारों धामों के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। केदारनाथ में हाल की बर्फबारी के कारण यात्रा प्रभावित हुई थी, जबकि उत्तराखंड का मौसम धामों की यात्रा के लिए अहम बना हुआ है।

