दिल्ली में नए प्रदूषण नियम
राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए 1 नवंबर 2026 से सख्त नियम लागू हो गए हैं। नए नियमों के तहत अब दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड सिर्फ BS-VI उत्सर्जन मानक वाले वाहन ही राजधानी में प्रवेश कर सकेंगे। इसका सीधा असर उत्तराखंड परिवहन निगम की बस सेवा पर पड़ा है।
200 बसों पर पड़ेगा असर
परिवहन निगम की प्रतिदिन विभिन्न रूटों पर औसतन 934 बसें संचालित होती हैं, जिनमें से करीब 400 बसें दिल्ली जाती हैं। रोडवेज प्रबंधन के अनुसार इनमें से 12 वोल्वो समेत करीब 200 बसें BS-VI मानक की नहीं हैं, इसलिए ये दिल्ली नहीं जा सकेंगी। सबसे ज्यादा असर दिल्ली-देहरादून रूट पर लग्जरी वोल्वो सेवा पर पड़ने की संभावना है — इस रूट पर चलने वाली 25 बसों में से 12 कम हो जाएंगी।
रोडवेज की वैकल्पिक योजना
रोडवेज के महाप्रबंधक (संचालन) क्रांति सिंह ने बताया कि करीब दो सौ बसें नई दिल्ली नहीं जा सकेंगी। निगम ने यात्रियों की सुविधा के लिए वोल्वो और एसी बसों के फेरों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई है। शुरुआत में छह वोल्वो बसों के फेरे बढ़ाए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर सभी 13 BS-VI वोल्वो बसों के फेरे बढ़ाए जाएंगे, जिससे कुल 26 सेवाएं चलाई जा सकेंगी।
अन्य रूटों पर चलेंगी वोल्वो
जो वोल्वो बसें दिल्ली नहीं जा सकेंगी, उन्हें आगरा, लखनऊ, चंडीगढ़ समेत अन्य रूटों पर संचालित करने की योजना बनाई जा रही है। परिवहन निगम के पास अभी सिर्फ दो सीएनजी बसें हैं, इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था सीमित संसाधनों के साथ ही करनी होगी। दिल्ली सरकार ने साफ किया है कि CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रवेश से छूट रहेगी, लेकिन पुराने डीजल-पेट्रोल वाहनों पर कोई राहत नहीं मिलेगी।
दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा से पहले बस सेवा की स्थिति जरूर जांच लें, क्योंकि वंदे भारत स्लीपर और बुलेट ट्रेन कॉरिडोर जैसी नई परियोजनाओं से भविष्य में दिल्ली कनेक्टिविटी और बेहतर होगी।

