भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार रात 11:51 बजे श्रीहरिकोटा से GSLV-F18 रॉकेट के जरिए नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया। शनिवार तड़के 12:23 बजे ISRO ने X पर ‘मिशन सक्सेस’ की घोषणा की।
PM मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ISRO के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई देते हुए कहा कि यह मिशन स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने इसे भारत की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
NavIC को मिली नई जान
NVS-03 के कक्षा में पहुंचने से NavIC नेटवर्क में सक्रिय सैटेलाइटों की संख्या फिर 4 हो गई है — पोजिशनिंग के लिए कम से कम इतने ही सैटेलाइट चाहिए होते हैं। सैटेलाइट में स्वदेशी रूबिडियम एटॉमिक क्लॉक लगी है और यह L1, L5 और S बैंड में सिग्नल देगा। ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने लॉन्च को ‘बेहद सटीक’ और रॉकेट के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में एक बताया।
पहली बार खुला पायरो वाल्व प्रयोग
इस मिशन की खास बात यह रही कि ISRO ने पहली बार सैटेलाइट के प्रोपल्शन सिस्टम के पायरो वाल्व पहले से खुले रखकर उड़ान भरी — PTI ने इसे अभूतपूर्व बताया। यह फैसला 2025 में NVS-02 के प्रोपल्शन फेलियर के बाद लिया गया था, जब सैटेलाइट ट्रांसफर ऑर्बिट से आगे नहीं बढ़ पाया था।
आगे क्या
अब NVS-03 अपने इंजन से कक्षा बढ़ाकर 32.5 डिग्री पूर्व के अंतिम स्लॉट तक पहुंचेगा, फिर जांच के बाद असली यूजर्स के लिए सिग्नल शुरू करेगा।
नेताओं और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी समेत कई नेताओं ने ISRO टीम को बधाई दी। हैदराबाद की अनंत टेक्नोलॉजीज ने इस मिशन में अहम भूमिका निभाई — कंपनी ने GSLV-F18 के लिए 46 फ्लाइट हार्डवेयर पैकेज सप्लाई किए। GSLV की यह 20वीं उड़ान थी, और पिछले मिशन से महज 56 दिन का अंतराल — अब तक का सबसे कम — भी एक रिकॉर्ड है।
बनासकांठा से PM-किसान की 24वीं किस्त जारी

