पिछड़ा वर्ग आयोग के समक्ष जनप्रतिनिधियों ने रखी क्षेत्रीय समस्याएं व सुझाव
बदायूं। प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह एवं सदस्यगण के बदायूँ भ्रमण के दौरान विकास भवन स्थित सभागार में ओबीसी वर्ग की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को लेकर जनप्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा हुई।आयोग ने विभिन्न विकासखंडों के ब्लॉक प्रमुख, क्षेत्र पंचायत सदस्यों एवं ग्राम प्रधानों से ओबीसी वर्ग की जनसंख्या,शिक्षा,रोजगार,कृषि,भूमि स्वामित्व,आर्थिक स्थिति, राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण से जुड़े विषयों पर जानकारी ली।
बैठक में आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री राम औतार सिंह, सदस्य श्री बृजेश कुमार (सेवानिवृत्त डी.जे.), श्री संतोष कुमार विश्वकर्मा (सेवानिवृत्त ए.डी.जे.)डॉ. अरविन्द कुमार चौरसिया (सेवानिवृत्त आई.ए.एस.) एवं श्री एस.पी. सिंह (सेवानिवृत्त आई.ए.एस.) उपस्थित रहे। बैठक में विभिन्न विकासखंडों के ब्लॉक प्रमुख, क्षेत्र पंचायत सदस्यों एवं ग्राम प्रधानों ने अपने-अपने क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों एवं ओबीसी वर्ग से संबंधित विभिन्न जानकारियां आयोग के समक्ष रखीं।
आयोग ने जनप्रतिनिधियों से उनके क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग के लोगों की वर्तमान सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति,रहन-सहन, आय के मुख्य स्रोत, बच्चों की शिक्षा, भूमि स्वामित्व,कृषि एवं अन्य व्यवसाय,ट्रैक्टर एवं अन्य संसाधनों की उपलब्धता,सरकारी नौकरी तथा आर्थिक स्थिति के संबंध में जानकारी ली।साथ ही आरक्षण से संबंधित विषयों पर भी जनप्रतिनिधियों से जानकारी एवं सुझाव प्राप्त किए गए।
बैठक में आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री राम औतार सिंह, सदस्य श्री बृजेश कुमार (सेवानिवृत्त डी.जे.), श्री संतोष कुमार विश्वकर्मा (सेवानिवृत्त ए.डी.जे.)डॉ. अरविन्द कुमार चौरसिया (सेवानिवृत्त आई.ए.एस.) एवं श्री एस.पी. सिंह (सेवानिवृत्त आई.ए.एस.) उपस्थित रहे। बैठक में विभिन्न विकासखंडों के ब्लॉक प्रमुख, क्षेत्र पंचायत सदस्यों एवं ग्राम प्रधानों ने अपने-अपने क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों एवं ओबीसी वर्ग से संबंधित विभिन्न जानकारियां आयोग के समक्ष रखीं।
आयोग ने जनप्रतिनिधियों से उनके क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग के लोगों की वर्तमान सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति,रहन-सहन, आय के मुख्य स्रोत, बच्चों की शिक्षा, भूमि स्वामित्व,कृषि एवं अन्य व्यवसाय,ट्रैक्टर एवं अन्य संसाधनों की उपलब्धता,सरकारी नौकरी तथा आर्थिक स्थिति के संबंध में जानकारी ली।साथ ही आरक्षण से संबंधित विषयों पर भी जनप्रतिनिधियों से जानकारी एवं सुझाव प्राप्त किए गए।

आसफपुर के ग्राम पृथ्वीपुर के ग्राम प्रधान चेतन सिंह ने बताया कि उनके क्षेत्र में लगभग 4,000 की आबादी है, जिसमें करीब 20 लोग ही सरकारी नौकरी में हैं। उन्होंने बताया कि ओबीसी वर्ग के लोगों के पास भूमि का स्वामित्व कम है। उनके क्षेत्र में यादव, पाल एवं लोधी समाज के लोग हैं, जिनमें पाल समाज के लोगों की आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है।
ब्लॉक दहगवां के ग्राम रसूलपुर कलां के ग्राम प्रधान गंगा सिंह ने बताया कि वर्तमान में मिल रहा 27 प्रतिशत आरक्षण ठीक है। उनके क्षेत्र में लगभग 500 परिवार रहते हैं, जिनमें कुछ परिवारों के पास अपनी भूमि भी नहीं है। कुंवरगांव के ग्राम प्रधान ने बताया कि उनके क्षेत्र की आबादी लगभग 2,500 है।ओबीसी वर्ग में जाट,प्रजापति एवं सैनी समाज के लोग अधिक हैं तथा जीवन-यापन का मुख्य आधार कृषि है।
ग्राम बागपुर के ग्रीश कुमार ने बताया कि उनके क्षेत्र में ओबीसी वर्ग के लोग काफी पिछड़े हुए हैं। पशुपालन एवं खेती जीवन-यापन का मुख्य आधार है। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में लगभग 20 प्रतिशत लोग ही बच्चों को शिक्षा दिला पाते हैं तथा करीब 15 प्रतिशत लोग ही बेटियों को शिक्षा दिलाते हैं। उन्होंने आरक्षण बढ़ाने की आवश्यकता बताते हुए क्षेत्र में शिक्षा की कमी का भी उल्लेख किया।
ग्राम लोहाठेर के सुधीर यादव ने बताया कि उनके गांव में अभी तक ओबीसी वर्ग के लिए एक भी सीट नहीं रही है। उन्होंने आरक्षण बढ़ाने का सुझाव दिया। उझानी ब्लॉक प्रमुख शिशुपाल सिंह शाक्य ने बताया कि उनके क्षेत्र में ओबीसी वर्ग की स्थिति काफी कमजोर है तथा ज्यादातर लोग गांव से बाहर ईंट-भट्ठों पर कार्य करने के लिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में जातिगत भेदभाव अधिक नहीं है।
ग्राम सोही के सोरन सिंह ने बताया कि उनके क्षेत्र की आबादी लगभग 4,500 है। पिछली बार गांव में ओबीसी सीट थी। उनके क्षेत्र में ओबीसी वर्ग में मौर्य, शाक्य, माली, प्रजापति एवं मुस्लिम समाज के लोग हैं। उन्होंने क्षेत्र की स्थिति सामान्य बताते हुए कहा कि लगभग 60-65 परिवारों को आवास की आवश्यकता है तथा करीब आधे लोग भूमिहीन हैं।
आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने जनप्रतिनिधियों के सुझावों एवं समस्याओं को सुना। चर्चा के दौरान शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वरोजगार एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व से संबंधित विषयों के साथ-साथ कुछ जातियों तथा भौगोलिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में आर्थिक एवं शैक्षिक चुनौतियों की जानकारी सामने आई। आयोग ने क्षेत्रीय स्तर से प्राप्त तथ्यों एवं सुझावों को अपनी प्रक्रिया में संकलित करने की बात कही।साथ ही बताया कि इस मंच के माध्यम से जो लोग अपनी बात नहीं रख पाए हैं,वे पिछड़ा वर्ग से संबंधित अपनी जानकारी एवं सुझाव विकास भवन,लखनऊ को पत्र के माध्यम से भी भेज सकते हैं।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी गामिनी सिंगला,जिला विकास अधिकारी मनोज कुमार,परियोजना निदेशक डीआरडीए संतोष कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी याबर अब्बास सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।रिपोर्ट-जयकिशन सैनी
ब्लॉक दहगवां के ग्राम रसूलपुर कलां के ग्राम प्रधान गंगा सिंह ने बताया कि वर्तमान में मिल रहा 27 प्रतिशत आरक्षण ठीक है। उनके क्षेत्र में लगभग 500 परिवार रहते हैं, जिनमें कुछ परिवारों के पास अपनी भूमि भी नहीं है। कुंवरगांव के ग्राम प्रधान ने बताया कि उनके क्षेत्र की आबादी लगभग 2,500 है।ओबीसी वर्ग में जाट,प्रजापति एवं सैनी समाज के लोग अधिक हैं तथा जीवन-यापन का मुख्य आधार कृषि है।
ग्राम बागपुर के ग्रीश कुमार ने बताया कि उनके क्षेत्र में ओबीसी वर्ग के लोग काफी पिछड़े हुए हैं। पशुपालन एवं खेती जीवन-यापन का मुख्य आधार है। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में लगभग 20 प्रतिशत लोग ही बच्चों को शिक्षा दिला पाते हैं तथा करीब 15 प्रतिशत लोग ही बेटियों को शिक्षा दिलाते हैं। उन्होंने आरक्षण बढ़ाने की आवश्यकता बताते हुए क्षेत्र में शिक्षा की कमी का भी उल्लेख किया।
ग्राम लोहाठेर के सुधीर यादव ने बताया कि उनके गांव में अभी तक ओबीसी वर्ग के लिए एक भी सीट नहीं रही है। उन्होंने आरक्षण बढ़ाने का सुझाव दिया। उझानी ब्लॉक प्रमुख शिशुपाल सिंह शाक्य ने बताया कि उनके क्षेत्र में ओबीसी वर्ग की स्थिति काफी कमजोर है तथा ज्यादातर लोग गांव से बाहर ईंट-भट्ठों पर कार्य करने के लिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में जातिगत भेदभाव अधिक नहीं है।
ग्राम सोही के सोरन सिंह ने बताया कि उनके क्षेत्र की आबादी लगभग 4,500 है। पिछली बार गांव में ओबीसी सीट थी। उनके क्षेत्र में ओबीसी वर्ग में मौर्य, शाक्य, माली, प्रजापति एवं मुस्लिम समाज के लोग हैं। उन्होंने क्षेत्र की स्थिति सामान्य बताते हुए कहा कि लगभग 60-65 परिवारों को आवास की आवश्यकता है तथा करीब आधे लोग भूमिहीन हैं।
आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने जनप्रतिनिधियों के सुझावों एवं समस्याओं को सुना। चर्चा के दौरान शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वरोजगार एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व से संबंधित विषयों के साथ-साथ कुछ जातियों तथा भौगोलिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में आर्थिक एवं शैक्षिक चुनौतियों की जानकारी सामने आई। आयोग ने क्षेत्रीय स्तर से प्राप्त तथ्यों एवं सुझावों को अपनी प्रक्रिया में संकलित करने की बात कही।साथ ही बताया कि इस मंच के माध्यम से जो लोग अपनी बात नहीं रख पाए हैं,वे पिछड़ा वर्ग से संबंधित अपनी जानकारी एवं सुझाव विकास भवन,लखनऊ को पत्र के माध्यम से भी भेज सकते हैं।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी गामिनी सिंगला,जिला विकास अधिकारी मनोज कुमार,परियोजना निदेशक डीआरडीए संतोष कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी याबर अब्बास सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।रिपोर्ट-जयकिशन सैनी

