दातागंज थाने के पास युवती की गला रेतकर हत्या में पिता-भाइयों सहित चार को उम्रकैद
बदायूं।बरेली की करगैना बीडीए कॉलोनी निवासी देवेंद्र सिंह के साथ आर्य समाज मंदिर में प्रेम विवाह करने वाली युवती अर्चना की दातागंज थाने से पहले सड़क पर चाकू से गला रेतकर हत्या करने के मामले में एडीजे कु. रिंकू की कोर्ट ने मृतका के दो भाइयों रवित कुमार व पुष्पेंद्र, पिता चंद्रपाल और कुंवरपाल (गोद लेने वाले पिता) निवासी पलिया गूजर को दोषी करार दिया।
पुलिस ने विवेचना के बाद चारों अभियुक्तों के विरुद्ध कोर्ट में आरोपपत्र प्रस्तुत किया। इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई शुरू की। पांच साल के बाद कोर्ट ने बृहस्पतिवार को चारों अभियुक्तों को सजा सुनाई। कोर्ट ने हत्या में आजीवन कारावास की कैद के साथ 25-25 हजार का जुर्माना लगाया। जुर्माना न भरने पर तीन-तीन माह की अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी। चाकू बरामद होने के मामले में दोषसिद्ध रवित पर एक हजार का जुर्माना भी लगाया।
देवेंद्र की पलिया गूजर में ननिहाल, आने-जाने से हुआ था अर्चना से प्यार
पलिया गूजर गांव की रहने वाली युवती अर्चना बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। देवेंद्र की पलिया गूजर में ननिहाल है। उसका वहां आना-जाना था। उसी दौरान दोनों में प्यार हो गया था। परिजनों के पाबंदी लगाने पर अर्चना देवेंद्र के साथ उसके घर बरेली चली गई थी और वहां प्रेम विवाह कर लिया था। इससे अर्चना का परिवार बेहद नाराज हो गया था। उच्च न्यायालय ने अर्चना और देवेंद्र को सुरक्षा देने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद सुरक्षा दिए बगैर बयान दर्ज कराने को कह दिया गया था। इसी के लिए वे दोनों जब दातागंज थाने के पास पहुंचे तो अभियुक्तों ने उनकी गाड़ी को फिल्मी स्टाइल में रोका और अर्चना पर हमला कर दिया था।
दोषसिद्ध जुड़वां भाई एक ही शक्ल व कद काठी के, एक जैसे ही पहनते थे कपड़े
बेटी की हत्या के दोषसिद्ध अभियुक्त जुड़वा भाइयों में चंद्रपाल और कुंवरपाल की कहानी काफी चर्चित रही है। दोनों एक ही शक्ल व कद काठी के हैं। दोनों एक जैसे ही कपड़े पहनते थे। नहाना-खाना पीने के साथ ही वे संग ही सोते थे। दोनों भाई राजनीति से भी जुड़े रहे। वह कांग्रेस के जिला महामंत्री भी रहे। दोनों भाइयों के साथ बतौर पत्नी रह रही महिला जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ चुकी थी। आरोपी बेटा प्रधान का चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गया था। दोनों जुड़वां भाइयों पर एक तमिल फिल्म भी बनी। बताया जा रहा है कि दोनों जुड़वां भाइयों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी थी। पुलिस ने पहले कुंवरपाल को गिरफ्तार किया। वहां से कुछ दूर चंद्रपाल ने कुंवरपाल को गिरफ्तार देख खुद को पुलिस के हवाले कर दिया था। बताया जा रहा है कि दोनों भाइयों में एक विशेषता ये थी कि वे एक-दूसरे से अलग नहीं रह सकते थे। इधर, बताते हैं कि दोनों की पत्नी एक है तो उससे जन्मे बच्चों के पिता के नाम आगे चंद्रपाल-कुंवरपाल लिखा जाता है।
अर्चना अपने पति देवेंद्र के साथ रात साढ़े 12 बजे दातागंज कोतवाली में बयान दर्ज कराने जा रही थी। इसकी जानकारी उसके पति देवेंद्र के कुछ रिश्तेदारों को थी। ननिहाल होने के नाते युवती के मायके में भी देवेंद्र के दो-चार रिश्तेदार थे। उन्हीं में से किसी ने आरोपियों को दोनों की दातागंज कोतवाली जाने की सटीक सूचना दी थी। पहले से जानकारी होने पर हत्यारोपियों ने थाने से पहले ही कुछ दूर उनको रास्ते में रोक लिया था।
