अमरोहा (जावेद चौधरी – समर इंडिया संवाददाता)। चुनावी सरगर्मियों के बीच अमरोहा में कुछ पैराशूट प्रत्याशियों द्वारा गिने-चुने पत्रकारों के साथ अपनाई जा रही कथित बेरुखी का मामला इन दिनों शहर में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जाने वाले पत्रकार हमेशा निष्पक्ष रूप से जनता तक हर पक्ष की बात पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। ऐसे में यदि किसी जनप्रतिनिधि या चुनावी प्रत्याशी का व्यवहार पत्रकारों के प्रति सम्मानजनक नहीं होता है, तो यह स्वाभाविक रूप से कई बड़े सवाल खड़े करता है।
संवाद का सेतु हैं पत्रकार पत्रकारों का मुख्य दायित्व जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद का एक मजबूत सेतु बनना है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और खुले संवाद को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में कुछ स्थानीय पत्रकारों से जानबूझकर दूरी बनाना या केवल चुनिंदा और ‘कानाफूसी’ करने वाले लोगों के साथ ही संवाद करना किसी भी नजरिए से स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता है।
गलतफहमी है तो संवाद से हो दूर हालांकि, इस पूरे मामले में संबंधित पक्ष (प्रत्याशियों) की प्रतिक्रिया सामने आना भी अत्यंत आवश्यक है। यदि किसी भी प्रकार की गलतफहमी उत्पन्न हुई है, तो उसे दूरी बनाकर नहीं, बल्कि खुले संवाद के माध्यम से दूर किया जाना चाहिए।
लोकतंत्र में सभी पत्रकारों के साथ समान व्यवहार और सम्मानजनक संवाद ही किसी भी जनप्रतिनिधि की सकारात्मक छवि को मजबूत करता है। यह न केवल उनकी राजनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है, बल्कि आम जनता के बीच उनके प्रति विश्वास कायम रखने में भी एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

