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Vastu & Religion : घर में शिवलिंग स्थापित करने के ये हैं सख्त नियम! भूलकर भी इस दिशा में न हो जलधारी का मुख

On: July 31, 2026 1:31 PM
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नई दिल्ली (धर्म/अध्यात्म डेस्क)।“क्या हम घर में शिवलिंग रख सकते हैं?” यह एक ऐसा सवाल है जो हर शिव भक्त के मन में कभी न कभी जरूर आता है। खासतौर पर सावन (Sawan) के पवित्र महीने में लोग इस बारे में खूब सर्च करते हैं। घर में शिवलिंग रखने को लेकर लोगों के अलग-अलग मत देखने को मिलते हैं। कोई कहता है कि शिवलिंग घर में रखा जा सकता है, तो कोई इसे अनुचित बताता है। आज हम आपकी इस पूरी कंफ्यूजन को दूर करेंगे और बताएंगे कि हमारे शास्त्र इस बारे में क्या कहते हैं।

घर में शिवलिंग रखने को लेकर क्या कहते हैं शास्त्र?

धर्म शास्त्रों (विशेषकर शिव पुराण और स्कंद पुराण) के अनुसार, घर में शिवलिंग बिल्कुल रखा जा सकता है और यह अति फलदायी भी माना गया है। बशर्ते, इसका आकार हाथ के अंगूठे के बराबर या अधिकतम 2 से 3 इंच तक का ही हो। इससे बड़े आकार का शिवलिंग घर में रखना वर्जित माना गया है। इसके साथ ही, उसकी नियमित रूप से पूजा-आराधना होना अत्यंत आवश्यक है।

घर में कौन सा शिवलिंग रखना चाहिए?

प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों और पंडितों के अनुसार घर में पारद या फिर नर्मदेश्वर शिवलिंग रखना बेहद शुभ होता है।

  • नर्मदेश्वर शिवलिंग: यह एकमात्र ऐसा शिवलिंग है जिसे घर में स्थापित करने के लिए किसी विशेष प्राण-प्रतिष्ठा या पूजा-अर्चना की आवश्यकता नहीं होती। इसे आप सीधे नदी से लाकर घर में स्थापित कर सकते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने मां नर्मदा को वरदान दिया था कि उनके तट का हर कंकर शिवलिंग माना जाएगा, इसलिए ये ‘स्वयंभू’ होते हैं।

  • पारद शिवलिंग: पारे से तैयार किया गया यह दुर्लभ शिवलिंग धन-धान्य, आरोग्य और पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति कराता है। इसकी उपासना से नवग्रहों के दोषों से भी छुटकारा मिलता है।

शिवलिंग की पूजा के जरूरी नियम (Rules of Worship):

अगर आपने घर में शिवलिंग रखा है, तो इन नियमों का पालन अवश्य करें:

  1. दिशा का ध्यान: जलाभिषेक के समय आपका मुख और शिवलिंग की जलधारी का मुख उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए।

  2. नियमित अभिषेक: शिवलिंग पर रोजाना जल चढ़ाना अनिवार्य है।

  3. बेलपत्र अर्पण: यदि संभव हो, तो शिवलिंग पर रोजाना बेल पत्र जरूर अर्पित करें।

  4. मंत्र जाप: शिवलिंग का अभिषेक करते समय मन ही मन ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करते रहना चाहिए।

  5. आरती: पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती जरूर करें।

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