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जामुन शुगर के रोगियों के लिए परमौषधि : डॉ. अमोल गुप्ता

On: July 14, 2026 8:31 PM
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जामुन शुगर के रोगियों के लिए परमौषधि : डॉ. अमोल गुप्ता

सहसवान। वर्षा ऋतु में आसानी से उपलब्ध होने वाला जामुन केवल स्वादिष्ट फल ही नहीं, बल्कि मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी प्राकृतिक फल भी है।यह जानकारी डॉ. राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल सहसवान के कुशल होम्योपैथिक चिकित्सक, जीर्ण एवं एवं चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अमोल गुप्ता ने दी।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि जामुन का *ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, इसलिए इसका सेवन करने से रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) तेजी से नहीं बढ़ती। जामुन में उपस्थित *जाम्बोलिन (Jamboline)* तथा *जाम्बोसिन (Jambosine)* जैसे प्राकृतिक तत्व शरीर में कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण एवं शर्करा के उपयोग की प्रक्रिया को संतुलित रखने में सहायक माने जाते हैं।इसके अतिरिक्त जामुन में प्रचुर मात्रा में *फाइबर, विटामिन-सी, आयरन,पोटैशियम तथा शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट* पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं।

उन्होंने बताया कि जामुन का नियमित एवं संतुलित मात्रा में सेवन पाचन क्रिया को सुधारता है, कब्ज की समस्या कम करता है तथा वजन नियंत्रित रखने में भी सहायक हो सकता है।जामुन की गुठली का चूर्ण भी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में लंबे समय से उपयोग किया जाता रहा है, किंतु इसका सेवन केवल चिकित्सकीय सलाह से ही करना चाहिए।

डॉ. अमोल गुप्ता ने स्पष्ट किया कि जामुन मधुमेह की दवा का विकल्प नहीं है, बल्कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, योग, उचित जीवनशैली तथा चिकित्सक द्वारा निर्धारित उपचार के साथ एक सहायक प्राकृतिक आहार के रूप में लाभदायक हो सकता है। मधुमेह के रोगियों को बिना चिकित्सकीय परामर्श के अपनी दवाएँ बंद नहीं करनी चाहिए और समय-समय पर ब्लड शुगर की जाँच अवश्य करानी चाहिए।

उन्होंने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रतिदिन 30 से 45 मिनट योगाभ्यास करने से मधुमेह नियंत्रण में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है।विशेष रूप से मंडूकासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, वज्रासन, पवनमुक्तासन तथा भुजंगासन के साथ अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम एवं ध्यान का नियमित अभ्यास तनाव कम करने, चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को बेहतर बनाने तथा समग्र स्वास्थ्य में सुधार करने में सहायक हो सकता है।

अंत में डॉ. गुप्ता ने कहा कि प्राकृतिक एवं मौसमी फलों का संतुलित सेवन, नियमित योग, पर्याप्त नींद, तनावमुक्त जीवनशैली तथा विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श—ये सभी मिलकर मधुमेह पर प्रभावी नियंत्रण रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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