दैनिक योग अपनाएँ, स्वस्थ जीवन पाएँ : डॉ. अमोल गुप्ता
केवल योग दिवस तक ही सीमित न रह जाए हमारा योगाभ्यास
सहसवान।प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ.अमोल गुप्ता,डॉ.राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल,सहसवान ने नागरिकों से दैनिक जीवन में योग को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं,बल्कि शरीर,मन और आत्मा के समग्र संतुलन का विज्ञान है।वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, उच्च रक्तचाप,मधुमेह, मोटापा,अनिद्रा तथा मानसिक अवसाद जैसी समस्याओं से बचाव के लिए योग अत्यंत प्रभावी माध्यम है।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि प्रतिदिन 30 से 45 मिनट योगाभ्यास करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है,मानसिक शांति प्राप्त होती है तथा जीवनशैली से संबंधित अनेक रोगों की रोकथाम में सहायता मिलती है।

1. ताड़ासन
शरीर की मुद्रा (Posture) में सुधार करता है।
रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है।
शरीर का संतुलन बढ़ाता है।
2. भुजंगासन
पीठ एवं कमर की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है।
तनाव और थकान को कम करता है।
3. वज्रासन
पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है।
भोजन के बाद किया जाने वाला श्रेष्ठ आसन है।
गैस एवं अपच में लाभकारी।
4. पवनमुक्तासन
गैस, कब्ज और पेट की समस्याओं में सहायक।
पेट की मांसपेशियों को सशक्त बनाता है।
5. शवासन
मानसिक तनाव एवं चिंता को कम करता है।
शरीर और मन को पूर्ण विश्राम प्रदान करता है।
उच्च रक्तचाप एवं अनिद्रा में उपयोगी।
प्रमुख प्राणायाम एवं उनके लाभ
अनुलोम-विलोम
नाड़ियों का शोधन करता है।
मानसिक एकाग्रता एवं शांति बढ़ाता है।
रक्त संचार को बेहतर बनाता है।
भ्रामरी प्राणायाम
तनाव, चिंता एवं क्रोध को कम करता है।
मस्तिष्क को शांत एवं स्थिर बनाता है।
अनिद्रा में लाभकारी।
नाड़ी शोधन प्राणायाम
श्वसन तंत्र को मजबूत करता है।
मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक।
एकाग्रता एवं स्मरण शक्ति बढ़ाता है।
उज्जायी प्राणायाम
फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है।
तनाव एवं मानसिक अशांति को कम करता है।
योग और होम्योपैथी का संबंध
डॉ. अमोल गुप्ता ने कहा कि योग और होम्योपैथी दोनों ही समग्र स्वास्थ्य (Holistic Health) की अवधारणा पर आधारित हैं।जहाँ होम्योपैथी शरीर की आंतरिक जीवन शक्ति (Vital Force) को संतुलित कर रोगों के मूल कारणों पर कार्य करती है, वहीं योग शरीर, मन और प्राण ऊर्जा को संतुलित कर स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है।योग और होम्योपैथी का संयुक्त अभ्यास व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने,मानसिक तनाव कम करने,जीवनशैली संबंधी रोगों के नियंत्रण तथा संपूर्ण स्वास्थ्य संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।दोनों पद्धतियाँ रोगी को केवल रोगमुक्त ही नहीं बल्कि स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जीने की दिशा में प्रेरित करती हैं।
अंत में डॉ. गुप्ता ने सभी नागरिकों से प्रतिदिन योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने तथा स्वस्थ, निरोग एवं सकारात्मक जीवन की ओर अग्रसर होने का संदेश दिया। 


