देहरादून। वायुसेना के AN-32 विमान हादसे में वीरगति को प्राप्त हुए देवभूमि के लाल, शहीद प्रशांत का पार्थिव शरीर पूरे सैन्य सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हो गया। देहरादून के श्मशान घाट पर जब इस वीर सपूत का अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तो वहां का दृश्य इतना मार्मिक था कि पत्थर दिल इंसान की भी आंखें नम हो जाएं। शहादत के इस मौके पर एक तरफ परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था, तो दूसरी तरफ अपने लाल के सर्वोच्च बलिदान पर हर किसी का सीना गर्व से चौड़ा था।
मां के हाथों में तिरंगा, पत्नी की आंखों में अंतहीन दर्द
श्मशान घाट पर देश के लिए जान न्यौछावर करने वाले प्रशांत की अंतिम विदाई का मंजर बेहद हृदयविदारक था:
गर्व से भरी मां: एक मां जिसने अपना जवान बेटा खो दिया, वह अपने आंसुओं को पीकर, हाथों में देश की शान ‘तिरंगा’ (Tricolor) थामे श्मशान घाट पहुंचीं। उनका यह जज्बा देख वहां मौजूद हर शख्स उनके आगे नतमस्तक हो गया।
तस्वीर थामे पत्नी: शहीद प्रशांत की पत्नी का दुख शब्दों में बयां करना नामुमकिन था। वह श्मशान घाट पर अपने पति की तस्वीर को मजबूती से सीने से लगाए चिता के बिल्कुल पास खड़ी रहीं। उनकी पथराई आंखों में अपने सुहाग को खोने का दर्द और उनकी बहादुरी का गर्व, दोनों साफ झलक रहे थे।
सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम सलामी
शहीद का पार्थिव शरीर जब सेना के विशेष वाहन से उनके घर और फिर श्मशान घाट लाया गया, तो पूरे रास्ते देशभक्ति का माहौल रहा।
सेना की विशेष टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर (Guard of Honor) देकर शहीद प्रशांत को अंतिम सलामी दी।
सेना के जवानों ने हवा में गोलियां दागकर अपने वीर साथी को श्रद्धांजलि दी।
सैन्य अधिकारियों ने पूरे सम्मान के साथ शहीद के पार्थिव शरीर से तिरंगा हटाकर उसे परिजनों को सौंपा, जिसके बाद नम आंखों के साथ परिजनों ने उन्हें मुखाग्नि दी।
अंतिम दर्शनों के लिए उमड़ा जनसैलाब
उत्तराखंड के इस वीर सपूत के अंतिम दर्शनों के लिए आस-पास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोगों का हुजूम श्मशान घाट उमड़ पड़ा। पूरा आसमान ‘जब तक सूरज-चांद रहेगा, शहीद प्रशांत तेरा नाम रहेगा’, ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के गगनभेदी नारों से गूंजता रहा।
इस दौरान सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन, पुलिस अधिकारियों और कई राजनीतिक व सामाजिक हस्तियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया। देवभूमि ने आज फिर अपने एक बेटे को देश की वेदी पर कुर्बान कर दिया है, जिसकी शहादत को यह कृतज्ञ राष्ट्र कभी नहीं भुला सकेगा।

