नैनीताल (उत्तराखंड): कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और खुद पर भरोसा हो, तो ढेरों असफलताओं के बाद भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है सरोवर नगरी नैनीताल के रहने वाले पवन ने। पवन ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की पीसीएस परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में सफलता का परचम लहराते हुए ‘सहायक आयुक्त’ (Assistant Commissioner) का पद हासिल किया है। पवन की इस कामयाबी से न सिर्फ उनके परिवार में खुशी का माहौल है, बल्कि पूरा इलाका उनकी मेहनत को सलाम कर रहा है।
होटल कर्मचारी के बेटे ने पूरा किया प्रशासनिक अफसर बनने का सपना
पवन का यह सफर बेहद कठिनाइयों और आर्थिक तंगहाली से भरा रहा है। उनके पिता नैनीताल के एक स्थानीय होटल में मामूली कर्मचारी के रूप में काम करते हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद पिता ने बेटे की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। पवन ने भी अपने पिता के पसीने की हर बूंद की कीमत समझी और दिन-रात एक करके प्रशासनिक अधिकारी बनने के अपने सपने को सच कर दिखाया।
7 बार मिली असफलता, लेकिन नहीं खोया हौसला
पवन की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। पीसीएस परीक्षा में भले ही यह उनका पहला प्रयास था और उन्होंने इसे पहली बार में ही क्रैक कर लिया, लेकिन इससे पहले वे अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार 7 बार असफल रहे थे। कई बार बेहद करीब पहुंचकर चयन न होने से वे निराश जरूर हुए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपनी कमियों को सुधारा और जब पीसीएस की परीक्षा सामने आई, तो पहले ही दांव में सीधे सहायक आयुक्त का पद हासिल कर लिया।
युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत
पवन की सफलता का मूलमंत्र: “लगातार मिलने वाली असफलताओं से डरने के बजाय यह देखना जरूरी है कि कमी कहाँ रह गई। अगर आप अपनी गलतियों से सीखते हैं, तो सफलता एक दिन जरूर कदम चूमती है।”
पवन की इस ऐतिहासिक सफलता पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने उनके घर पहुंचकर माता-पिता को बधाई दी है। सोशल मीडिया पर भी पवन की यह संघर्ष गाथा जमकर वायरल हो रही है, जो आज के उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ी सीख है जो एक या दो असफलताओं के बाद निराश होकर बैठ जाते हैं।

