मुरादाबाद (बिलारी)/सोशल-क्राइम डेस्क: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के बिलारी कोतवाली क्षेत्र से एक ऐसा अनोखा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। यहां दो युवतियों के बीच पनपा गहरा प्रेम अब शादी और जीवन भर साथ रहने की जिद में बदल चुका है। इस फैसले ने जहां उनके परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है, वहीं समाज की पारंपरिक सोच को भी एक बड़ी चुनौती दी है। मामला इतना संवेदनशील हो गया कि पुलिस को भी कानून का हवाला देकर अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
रुद्रपुर की फैक्ट्री में शुरू हुई प्रेम कहानी
इस अनोखी प्रेम कहानी की शुरुआत उत्तराखंड के रुद्रपुर से हुई।
बिलारी क्षेत्र की रहने वाली एक युवती रुद्रपुर की एक फैक्ट्री में नौकरी करने गई थी।
वहां उसकी मुलाकात बिहार के आरा जिले की रहने वाली एक अन्य युवती से हुई।
साथ काम करते-करते दोनों के बीच पहले गहरी दोस्ती हुई और फिर धीरे-धीरे यह रिश्ता समलैंगिक प्रेम में बदल गया। दोनों ने समाज की परवाह किए बिना साथ रहने का फैसला किया और लंबे समय से पति-पत्नी की तरह जीवन जी रही थीं।
शादी के बहाने घर बुलाया तो उड़ गए परिवार के होश
जब बिलारी की रहने वाली युवती काफी लंबे समय तक अपने घर नहीं लौटी, तो चिंतित परिजनों ने एक तरकीब निकाली। उन्होंने उसे वापस बुलाने के लिए ‘शादी तय होने’ का बहाना बनाया।
युवती अपने घर तो आई, लेकिन अपनी उस महिला साथी को भी साथ लेकर आई।
घर पहुंचते ही दोनों के रिश्ते की हकीकत परिजनों के सामने आ गई, जिसे जानकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
परिजनों ने सामाजिक मर्यादा, लोक-लाज और मान-सम्मान का हवाला देकर दोनों को समझाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन दोनों युवतियां अपने फैसले पर अडिग रहीं।
थाने में चला घंटों हाई-वोल्टेज ड्रामा
जब घर में बात नहीं बनी और विवाद बढ़ा, तो मामला बिलारी कोतवाली पहुंच गया। परिजनों को उम्मीद थी कि पुलिस के दबाव में युवतियां मान जाएंगी, लेकिन थाने में घंटों तक हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा।
दोनों युवतियों ने पुलिस के सामने अपने आधार कार्ड और दस्तावेज पेश करते हुए खुद को ‘बालिग’ साबित कर दिया।
उन्होंने साफ कहा कि भारत के कानून के तहत उन्हें अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने और अपनी मर्जी से जीवन जीने का पूरा अधिकार है।
दस्तावेजों और कानून को देखते हुए पुलिस ने भी परिजनों को समझा दिया कि जब दोनों बालिग हैं, तो वे उनकी इच्छा के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकते।
एक-दूसरे का हाथ थामकर निकल गईं साथ
आखिरकार, कानून के आगे परिवार की एक न चली और पुलिस ने दोनों युवतियों को उनकी इच्छा के अनुसार स्वतंत्र छोड़ दिया। परिजन देर तक रोते हुए उन्हें मनाने की मिन्नतें करते रहे, लेकिन दोनों अपने फैसले से पीछे नहीं हटीं। एक-दूसरे का हाथ थामे वे थाने से अपनी नई जिंदगी की शुरुआत के लिए निकल गईं। यह घटना अब इलाके में बदलती सोच और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों को लेकर चर्चा का विषय बन गई है।

