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holi 2026-इस बार होली पर मांस-शराब का सेवन किया तो हो जाओगे बर्बाद! संत प्रेमानंद जी ने दी चेतावनी, चंद्र ग्रहण और सूतक काल में रहें सावधान

On: March 2, 2026 8:27 AM
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holi 2026
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holi 2026-नई दिल्ली | अध्यात्म और धर्म डेस्क रंगों और उमंगों का महापर्व ‘होली’ देशभर में दस्तक दे चुका है। बुराई पर अच्छाई की जीत का यह त्योहार आपसी प्रेम, भाईचारे और सात्विकता का प्रतीक है। लेकिन आजकल कई लोग होली की आड़ में हुड़दंग मचाने, शराब पीने और मांस खाने जैसी तामसिक प्रवृत्तियों में डूब जाते हैं। इस वर्ष (2026) की होली ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि इस बार होली के ठीक बीच (3 मार्च) को चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) का साया है और सूतक काल (Sutak Kaal) लगने जा रहा है।

वृंदावन के प्रसिद्ध संत और आध्यात्मिक गुरु पूज्य प्रेमानंद जी महाराज ने इस विशेष अवसर को लेकर देशवासियों को कड़ी चेतावनी दी है। महाराज जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि इस पवित्र मौके पर, विशेषकर चंद्र ग्रहण और सूतक काल के दौरान, किसी ने मांस और शराब का सेवन किया, तो उसका सर्वनाश तय है। आइए विस्तार से जानते हैं कि महाराज जी ने क्या कहा है और इस दौरान कौन-से कार्य पूर्णतः वर्जित हैं।

“होली भगवान के प्रेम का पर्व है, वासना का नहीं” – संत प्रेमानंद जी

वृंदावन वाले संत श्री प्रेमानंद जी महाराज अपने प्रवचनों में हमेशा सात्विक जीवन शैली पर जोर देते हैं। होली के संदर्भ में उन्होंने कड़े शब्दों में कहा है कि “होली राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम और प्रह्लाद की भक्ति का उत्सव है। इसे लोगों ने शराब पीने और मांस खाने का दिन बना लिया है, जो घोर पाप है।” महाराज जी के अनुसार:

  • तामसिक भोजन लाता है दरिद्रता: मांस और मदिरा (शराब) तामसिक भोजन की श्रेणी में आते हैं। इनका सेवन करने से मनुष्य की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है और घर में अलक्ष्मी (दरिद्रता) का वास होता है।

  • ग्रहण के दौरान पाप का सौ गुना प्रभाव: प्रेमानंद जी बताते हैं कि ग्रहण काल और सूतक के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव सबसे अधिक होता है। इस दौरान किए गए किसी भी पाप कर्म (जैसे जीव हत्या, मांस भक्षण या नशा) का दंड व्यक्ति को सौ गुना अधिक भुगतना पड़ता है, जिससे उसका पूरा जीवन बर्बाद हो सकता है।

होली पर चंद्र ग्रहण और सूतक काल का साया

इस साल तिथियों के गणित के अनुसार, 2 मार्च की मध्यरात्रि होलिका दहन होगा और 4 मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी। इसके बीच, यानी 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है।

  • सूतक काल का समय: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले ही लग जाता है। सूतक काल लगते ही सभी शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है और मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

  • इस संवेदनशील समय में ब्रह्मांड में कई नकारात्मक तरंगें सक्रिय रहती हैं, इसलिए ऋषियों-मुनियों ने इस दौरान विशेष संयम बरतने की सलाह दी है।

सूतक और ग्रहण काल में भूलकर भी न करें ये 5 काम (Prohibited Activities)

सूतक काल और चंद्र ग्रहण के दौरान शास्त्रों में कई कार्यों को पूर्णतः प्रतिबंधित (Ban) किया गया है। यदि आप जीवन में सुख-शांति चाहते हैं, तो इन नियमों का पालन अवश्य करें:

  1. मांस और मदिरा का पूर्ण त्याग: जैसा कि संत प्रेमानंद जी ने चेताया है, इस पूरी अवधि में भूलकर भी शराब, मांस, अंडा या किसी भी प्रकार के नशे का सेवन न करें। इसे सबसे बड़ा दोष माना गया है।

  2. भोजन पकाने और खाने की मनाही: सूतक काल शुरू होने के बाद और ग्रहण खत्म होने तक भोजन पकाना और खाना वर्जित होता है। (बीमार, वृद्ध और गर्भवती महिलाओं के लिए इसमें छूट है)। पहले से पके हुए भोजन और पानी में तुलसी के पत्ते डालकर रखने चाहिए।

  3. शारीरिक संबंध न बनाएं: इस पवित्र और संवेदनशील समय में ब्रह्मचर्य का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। कामुक विचारों से दूर रहें।

  4. धारदार चीजों का इस्तेमाल वर्जित: ग्रहण के दौरान कैंची, चाकू, सूई या किसी भी धारदार वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए। विशेषकर गर्भवती महिलाओं को इस नियम का सख्ती से पालन करना चाहिए।

  5. बाल और नाखून न काटें: सूतक काल और ग्रहण के दौरान बाल काटना, शेविंग करना या नाखून काटना दरिद्रता को आमंत्रण देने के समान है।

सूतक और ग्रहण काल में क्या करें? (What to do)

  • ईश्वर का ध्यान और नाम जप: प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि ग्रहण का समय किसी भी मंत्र को सिद्ध करने और भगवान का नाम जपने के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। इस दौरान एक जगह बैठकर ‘राधा-राधा’, ‘हरे कृष्ण’ या ‘ओम नमः शिवाय’ का मानसिक जाप करें।

  • स्नान और दान: 3 मार्च को ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। स्वयं स्नान करें और इसके बाद गरीबों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान अवश्य करें। ग्रहण के बाद किया गया दान महादान माना जाता है।

निष्कर्ष: होली जैसे पवित्र पर्व को नशे और अशुद्धता से मलिन न करें। संत प्रेमानंद जी महाराज की बातों का अनुसरण करते हुए सात्विकता के साथ रंगोत्सव मनाएं। तभी यह त्योहार आपके जीवन में सच्चे रंग, सुख और समृद्धि लेकर आएगा।

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