Akshaya Tritiya 2026 : नई दिल्ली/ज्योतिष डेस्क: सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का पर्व धन, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सोना-चांदी खरीदना और दान-पुण्य करना अनंत फलदायी होता है। अक्षय तृतीया को ‘अबूझ मुहूर्त’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, वर्ष 2026 में इसकी तारीख को लेकर श्रद्धालुओं के बीच काफी कन्फ्यूजन है कि यह 19 अप्रैल को है या 20 अप्रैल को। आइए, विस्तार से जानते हैं शास्त्रीय गणना और शुभ मुहूर्त।
19 या 20 अप्रैल: कब मनाएं अक्षय तृतीया?
हिंदू पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया के लिए वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का समय इस प्रकार है:
तिथि का आरंभ: 19 अप्रैल 2026 (रविवार) सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर।
तिथि का समापन: 20 अप्रैल 2026 (सोमवार) सुबह 07 बजकर 27 मिनट पर।
क्यों 19 अप्रैल को मनाना है श्रेष्ठ: यूं तो हिंदू धर्म में उदयकाल (सूर्योदय के समय वाली तिथि) का महत्व होता है, जिसके अनुसार 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया होनी चाहिए। लेकिन, अक्षय तृतीया के मुख्य अनुष्ठान और खरीदारी के लिए आवश्यक ‘तृतीया तिथि’ का अधिकतम भाग 19 अप्रैल को प्राप्त हो रहा है। विशेष रूप से खरीदारी और पूजा का मुहूर्त रविवार (19 अप्रैल) को ही मिल रहा है, इसलिए 19 अप्रैल 2026 को ही यह पर्व मनाना शास्त्रसम्मत रहेगा।
अक्षय तृतीया का पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन अत्यंत पवित्र है:
युगादि तिथि: इसी दिन सतयुग का समापन और त्रेतायुग का आरंभ माना जाता है।
हयग्रीव अवतार: भगवान विष्णु के अश्वमुख (घोड़े के सिर वाले) अवतार ‘हयग्रीव’ का प्राकट्य भी इसी दिन हुआ था।
अक्षय फल: इस दिन किए गए स्नान, दान और तप का फल कभी समाप्त नहीं होता (अक्षय रहता है), इसीलिए इसे अक्षय तृतीया कहते हैं।
पूजा और खरीदारी के शुभ मुहूर्त
यदि आप इस दिन सोना खरीदने या विशेष पूजा करने की योजना बना रहे हैं, तो इन समयों का ध्यान रखें:
पूजा का मुहूर्त: 19 अप्रैल की सुबह 10 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक।
सोना खरीदने का मुहूर्त: 19 अप्रैल की सुबह 10 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 20 अप्रैल की सुबह 07 बजकर 49 मिनट तक। इस लंबी अवधि में आप अपनी सुविधानुसार खरीदारी कर सकते हैं।

