अमरोहा (बुढ़नपुर): उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में ‘निपुण भारत मिशन’ को जमीन पर उतारने के लिए शिक्षा विभाग ने अपनी कमर कस ली है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य परियोजना कार्यालय (SPO) की प्रतिनिधि सुश्री मोहिनी ठाकुर ने जनपद के शैक्षिक ढांचे की गहन पड़ताल की। इस दौरान निपुण प्लस ऐप और KPI (Key Performance Indicators) के जरिए बच्चों के अधिगम स्तर को सुधारने पर विशेष जोर दिया गया।
तकनीकी चुनौतियों और स्पॉट असेसमेंट पर चर्चा
बैठक में NBMC पोर्टल के माध्यम से संचालित होने वाले ‘निपुण प्लस स्पॉट असेसमेंट’ की विस्तृत समीक्षा की गई। सुश्री मोहिनी ठाकुर ने फील्ड स्तर पर काम कर रहे ए.आर.पी. (ARP) और एस.आर.जी. (SRG) से सीधा संवाद किया।
ऐप की चुनौतियां: निपुण प्लस ऐप के संचालन के दौरान आने वाली तकनीकी और अकादमिक बाधाओं पर चर्चा हुई।
शुद्ध डेटा: अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि डेटा प्रविष्टि (Data Entry) में शत-प्रतिशत शुद्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि रिपोर्टिंग पारदर्शी हो सके।
BSA और डायट प्राचार्य के सख्त निर्देश
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने कार्यक्रम में मौजूद डी.एल.एड. प्रशिक्षुओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि निपुण आकलन की प्रक्रिया पूरी तरह से वस्तुनिष्ठ और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
KPI पर फोकस: सभी शैक्षणिक कार्मिकों को निर्धारित समय के भीतर अपने KPI लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निर्देशित किया गया।
नवाचार: डायट प्राचार्य/उप शिक्षा निदेशक ने स्कूलों में गतिविधि-आधारित अधिगम (Activity Based Learning) और बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों को लागू करने पर बल दिया।
मिशन का उद्देश्य: हर बच्चा बने ‘निपुण’
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जनपद अमरोहा में शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाना और विद्यार्थियों के अधिगम स्तर (Learning Outcomes) को निर्धारित लक्ष्यों तक पहुंचाना है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सतत मॉनिटरिंग और नवाचारात्मक शिक्षण से ही अमरोहा को ‘निपुण जनपद’ बनाया जा सकता है।

