चुनाव आयोग ने Supreme Court में बंगाल और तमिलनाडु में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण का बचाव किया है। आयोग ने कहा कि मतदाताओं के नाम काटने के आरोप बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए हैं और राजनीति से प्रेरित हैं। आयोग ने याचिकाओं को खारिज करने की मांग की और कहा कि बंगाल में मताधिकार से वंचित करने के आरोप गलत हैं। तमिलनाडु में भी मतदाताओं के नाम काटे जाने के दावे बढ़ा-चढ़ाकर किए गए हैं।
‘दहेज के कारण व्यावसायिक लेन-देन बनकर रह गई है शादी’, Supreme Court ने कहा- विवाह की पवित्रता हो रही खत्म
ये आरोप अंदाजे पर आधारित व राजनीति से प्रेरित हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने 11 नवंबर को द्रमुक, माकपा, कांग्रेस की बंगाल इकाई और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की याचिकाओं पर चुनाव आयोग से अलग-अलग जवाब मांगे थे। इन याचिकाओं में तमिलनाडु और बंगाल में एसआइआर की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी।

