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बेटे की मौत पर लक्ष्मी ने की मुस्लिम रिवाज से दफनाने की जिद, रातभर पुलिस के पहरे में रहा शव, सुबह हुआ ये फैसला..

On: September 11, 2025 6:55 PM
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बेटे की मौत पर लक्ष्मी ने की मुस्लिम रिवाज से दफनाने की जिद, रातभर पुलिस के पहरे में रहा शव, सुबह हुआ ये फैसला..

बदायूं के दातागंज क्षेत्र में 30 साल पहले शादी कर हिंदू बनी महिला अपने साथ जिस बेटे को लेकर आई थी। बुधवार को उसकी मौत हो गई। इसके अंतिम संस्कार को लेकर उस समय बखेड़ा खड़ा हो गया। जब मां ने उसका अंतिम संस्कार मुस्लिम रिवाज से करने का एलान कर दिया।गांव वालों ने एतराज किया तो पुलिस ने रातभर लाश को पहरे में रखा। बृहस्पतिवार सुबह को मृतक के सभी बहन भाई आ गए तब कहीं रजामंदी हुई और फिर हिंदू रीति-रिवाज से ही उसका अंतिम संस्कार किया गया।

बात करीब तीन दसक पहले की है।दातागंज थाना क्षेत्र के गांव सुखौरा निवासी रघुवीर सिंह पुलिस सिपाही थे। उनकी मौत के बाद उनका बेटा ओमकार सिंह पांडा ने बिहार में एक मुस्लिम युवती से शादी कर ली। शादी के बाद युवती ने अपना धर्म परिवर्तन कर नाम लक्ष्मी रख लिया था। इसी नाम से उसका आधार कार्ड भी है। करीब पांच साल पहले ओमकार सिंह पांडा की मौत हो गई।

शराब पीने का आदी था युवक :-बताते हैं कि लक्ष्मी पर ओमकार सिंह पांडा से शादी करने से पहले एक बेटा था। उसका नाम संजू रखा गया। संजू शराब का आदी था और पिछले दिनों से बीमार चल रहा था। उसकी शादी भी बिहार से हुई है। बुधवार को उसकी मौत हो गई। उसकी मौत के बाद उसकी मां लक्ष्मी ने यह कहकर बखेड़ा खड़ा कर दिया कि उसकी अंत्येष्टि मुस्लिम रीति-रिवाज से दफना कर की जाएगी।इस पर गांव में विरोध हो गया।
गांव वालों का कहना था कि अबतक के सभी कार्य उनके हिंदू होने के नाते सनातनी परंपरा के अनुसार हुए हैं तो अब यह अनोखा और विपरीत काम क्यों होगा। इस मामले में कोई बवाल न खड़ा हो जाए। इसलिए सूचना पर पुलिस भी गांव पहुंच गई, तब शव गांव में ही रखा रहा। गांव वालों का कहना था कि जब तक मृतक के भाई-बहन जो बाहर हैं, नहीं आ जाते तबतक अंतिम संस्कार न किया जाए। इस पर पुलिस ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया।
रात भर पुलिस के पहले में रही संजू की लाश:-रात भर पुलिस ने वहां रहकर शव की निगरानी की। मृतक का दिल्ली में रहने वाला भाई बिरजू भी दिल्ली से आ गया और सभी बहनें भी पहुंच गईं। सबकी राय जानी गई। गांव वालों से भी बात हुई तब उसकी मां मानी। बृहस्पतिवार सुबह हिंदू रीति-रिवाज से ही अंतिम संस्कार किया गया। छोटे भाई ने मृतक को मुखाग्नि दी। गांव के श्मशान घाट में उसकी चिता जलाई गई। पूरी रात पहरे पर रही पुलिस को अंतिम संस्कार के बाद राहत मिली।

हिंदू रीति रिवाज से चल रहा था अब तक पूरा कुनबा:-मृतक संजू (35) के पिता ओमकार सिंह की पांच वर्ष पहले मृत्यु हो जाने पर उनका अंतिम संस्कार हो या बाद में बहनों की शादी। सब हिंदू रीति-रिवाज से ही हुई। इसकी एक बहन सीमा की शादी बराही गांव में धर्मेंद्र सिंह के साथ, दूसरी बहन मीना की शादी शिवपुरी में रितेंद्र सिंह रिंकू के साथ हुई है। हालांकि यह अब परिवार के साथ सुखौरा गांव में ही रह रही है। तीसरी बहन जसौदा बनकोटा गांव में पिंटू सिंह के लिए ब्याही है। सब बहने बदायूं जिले में ही हैं।

छोटा भाई बिरजू की शादी नहीं हुई है। वह दिल्ली में रहकर मजदूरी कर घरवार की जरूरतों को पूरा करता है। इन सभी को संजू की मौत की सूचना दी गई। सभी देर रात तक पहुंच गए। भाई भी दिल्ली से यहां पहुंच था। परिवार के सभी सदस्यों के बीच काफी देर परामर्श हुआ, उन्होंने अपनी मां को भी समझाया। तब कहीं संजू की अंत्येष्टि की गई।

पड़ोसी बोला- क्या हो गया संजू की मां को, पूरी तरह थी सनातनी:-मृतक संजू के पड़ोसी नरेंद्र सिंह का कहना है कि पूरा परिवार अबतक हिंदू रीति रिवाज ही अपनाता रहा है। लक्ष्मी खुद सनातनी परंपरा के अनुसार ही धार्मिक कार्यक्रम तीज-त्योहार मनाती रही है। पूजा करना, व्रत-उपवास रखना और गो-वंशों को पालना और उन्हें रोटी निकालने जैसी परंपराएं अपनाती रही है। माना जा रहा है कि उन्हें किसी ने भड़काया है। इसकी वजह से ही उन्होंने अपने बेटे की मौत पर उसके दफनाने की जिद की थी। 

रिपोर्ट – जयकिशन सैनी (समर इंडिया)

Aman Kumar Siddhu

He has 19 years of experience in journalism. Currently he is the Editor in Chief of Samar India Media Group. He lives in Amroha, Uttar Pradesh. For contact samarindia22@gmail.com

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