नखासे पर कब्जे के लिए तीन दशक लड़े मुकदमा, अब दोनों पक्ष को 10-10 साल की सजा
दो परिवार 31 साल तक एक दूसरे को सजा दिलाने के लिए करते रहे कोर्ट की पैरवी, फैसला आया तो उड़ गए होश
बदायूं। वर्चस्व के झगड़े में दो परिवार 31 साल तक एक दूसरे को सजा दिलाने के लिए कोर्ट की पैरवी करते रहे। इतने साल बाद जब फैसला आया तो होश उड़ गए।दोनों पक्ष खुद को निर्दोष साबित करने लिए अपने-अपने अधिवक्ताओं से जोर आजमाइश कराते रहे।मंगलवार को दोनों पक्ष के 10 लोग दोषी पाए गए।कोर्ट ने इन लोगों को 22 अगस्त को ही जेल भेज दिया था। सजा मंगलवार को सुनाई गई।दोनों ही परिवार के लोग गमजदा हैं।

अब एक संयुक्त परिवार दो हिस्सों में बंट चुका था।एक दूसरे को मारने की फिराक में रहने लगे। कई बार एक दूसरे ने जानलेवा हमले भी किए, लेकिन मामला पुलिस तक नहीं पहुंचा था।आठ अप्रैल को रुपये के बंटवारे को लेकर एक दूसरे ने जानलेवा हमला कर दिया। निसार अहमद ने 11 लोगों के खिलाफ तो राशिद ने सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।तब से अब तक मुकदमा कोर्ट में चल रहा था।इस दौरान दोनों वादी की मौत हो गई। इसके बाद उनके बेटों ने कोर्ट की पैरवी शुरू की।
वर्चस्व की लड़ाई जो शुरू हुई तो चलती रही। इस दौरान दोनों पक्ष के आठ जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज था, उनकी मौत हो गई। 10 लोग बचे जो अब सभी 60 साल से अधिक की उम्र के हो गए है। दोनों पक्ष के लोगों ने हार नहीं मानी और नतीजा सामने आया कि सभी 10 आरोपियों को 10-10 साल की सजा हो गई। सभी को 31 साल बाद 30-30 हजार रुपये का अर्थदंड भी देना होगा। जबकि लूट मात्र तीन हजार रुपये की थी। अगर उसी समय मामले को परिवार और रिश्तेदारों के माध्यम से निपट गया होता तो आज यह दिन देखने को नहीं मिलता।
रिपोर्ट – जयकिशन सैनी (समर इंडिया)

