बिना सोचे समझे इस्तेमाल की जाने वाली ये चीजें धीरे-धीरे शरीर में कैंसर जैसे घातक रोग को न्योता दे सकती हैं- जानिए डॉ अमोल गुप्ता से
कैंसर का नाम सुनते हैं मरीज के हाथ-पैर फूल जाते हैं और इस नामुराद बीमारी का नाम ही डरावना लगता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये बेहद खतरनाक बीमारी अब तेजी से क्यों फैल रही हैं।कैंसर के बारे में हमने बात की सहसवान के डॉ राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल के जाने-माने होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ.अमोल गुप्ता से –

1. तेल को बार-बार गर्म करना (Reheating Oil)डॉ. अमोल गुप्ता का कहना है, बचा हुआ या बार-बार गर्म किया गया तेल ट्रांस फैट्स और फ्री रेडिकल्स बनाता है जो शरीर में सूजन और कैंसर का कारण बनते हैं। विशेषकर डीप फ्रायिंग के बाद बचे तेल को दोबारा इस्तेमाल करना बेहद खतरनाक होता है।
बचाव: एक ही तेल को बार-बार न गर्म करें। इस्तेमाल के बाद उसे फेंक दें या अन्य उपयोगों में लें (जैसे–दीपक में जलाना)।
2. प्लास्टिक के कंटेनर में खाना गरम करना या रखना|
एल्युमीनियम फॉयल पेपर
प्लास्टिक में मौजूद BPA, PVC और फ्थैलेट्स जैसी केमिकल्स माइक्रोवेव या गर्म खाने से मिलकर कार्सिनोजेनिक (कैंसर उत्पन्न करने वाले) बन सकते हैं। बहुत से लोग एल्युमीनियम के बर्तनों में खाना जैसे दूध गर्म करते हैं और चपाती के लिए फॉयल पेपर का इस्तेमाल करते हैं।
बचाव: माइक्रोवेव में प्लास्टिक कंटेनर का उपयोग न करें। कांच, मिट्टी या स्टील के बर्तन बेहतर हैं। चपाती रेप करने के लिए बटर पेपर का इस्तेमाल करें तो बेहतर है। नहीं तो आप कॉटन या मखमली पतले कपड़े में रोटी पैक कर सकते हैं।
3.प्लास्टिक की बोतल में पानी पीना / गर्म पानी भरना और नॉन-स्टिक बर्तन
गर्म पानी या धूप में रखा हुआ पानी प्लास्टिक की बोतल से केमिकल्स छोड़ता है। लोग प्लास्टिक के बर्तनों में खाना गर्म करके खाते हैं। वहीं नॉन स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल तेजी से हो रहा है लेकिन ये बर्तन कैंसर को बढ़ावा देते हैं।
बचाव: तांबे, कांच या स्टील की बोतल का उपयोग करें।
4. ज्यादा तला-भुना, प्रोसेस्ड या जला हुआ खाना
जली हुई रोटी, सब्जी या ज्यादा फ्राई किए गए स्नैक्स में एक्रिलामाइड और पॉलीसायक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAHs) बनते हैं जो कैंसर से जुड़े हैं। रेड मीट, प्रोसेस्ड मीट (जैसे सॉसेज, बेकन) में भी कैंसरकारक तत्व होते हैं।
बचाव: खाना धीमी आंच पर पकाएं, जला हुआ हिस्सा हटा दें और प्रोसेस्ड मीट से बचें।
5. कीटनाशकों और हार्मोन वाले फल-सब्जियां
हमारे घरों में आने वाले फलों-सब्ज़ियों में छुपे होते हैं पेस्टीसाइड्स, आर्टिफिशियल वैक्स और रसायन। लंबे समय तक इनके सेवन से लीवर, किडनी और आंत का कैंसर हो सकता है।
बचाव: इन्हें खाने से पहले बेकिंग सोडा या नमक के पानी से धोएं, जब संभव हो ऑर्गेनिक खरीदें।
6. सफाई में इस्तेमाल होने वाले केमिकल प्रोडक्ट्स
बाथरूम क्लीनर, बर्तन धोने वाले डिटर्जेंट, फर्श की फिनाइल में मौजूद केमिकल्स (जैसे फॉर्मलडिहाइड, बेंजीन) से सांस के जरिए कैंसरकारी तत्व शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
बचाव: प्राकृतिक विकल्पों जैसे – सिरका, नींबू, बेकिंग सोडा से सफाई करें।
7. सुगंधित अगरबत्तियां और रूम फ्रेशनर
इनसे निकलने वाला धुआं और केमिकल हवा में मिलकर फेफड़ों और स्किन कैंसर को बढ़ावा दे सकते हैं।
बचाव: प्राकृतिक धूप, कपूर या लौंग जलाएं। रूम फ्रेशनर की जगह नींबू और सिरका मिश्रण इस्तेमाल करें।
8. घर में सिगरेट/बीड़ी का धुआं
अगर किसी घर में कोई सदस्य सिगरेट पीता है, तो उसका धुआं “पैसिव स्मोकिंग” से पूरे परिवार को नुकसान पहुंचाता है, खासकर बच्चों को। इसी के साथ गंदे पानी का सेवन भी कैंसर के सेल्स को बहुत बढ़ावा देते हैं।साफ पानी का सेवन करें, आर.ओ. वाटर नहीं पी सकते तो आप पानी को उबाल कर पी सकते हैं।
बचाव: सिगरेट को पूरी तरह त्यागें और घर को धुएं से दूर रखें।
याद रखिए ये बात: हम खुद अपने घरों में, अपने रसोईघर में ऐसी कई आदतें और चीजें अपनाए हुए हैं।जो धीरे-धीरे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को न्योता दे रही हैं।अब समय है कि हम जागरूक बनें और रोजमर्रा की ज़िंदगी में डॉ अमोल गुप्ता द्धारा बताए गए उपरोक्त छोटे-छोटे बदलाव लाकर खुद को और अपने परिवार को इस खतरे से बचाएं।
रिपोर्ट – जयकिशन सैनी (समर इंडिया)

