सासाराम। पूर्व केंद्रीय मंत्री Upendra Kushwaha ने निशाना साधा है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि कांग्रेस अपने शासनकाल में क्यों जातीय जनगणना नहीं करा सकी थी? केंद्र सरकार के जातीय जनगणना कराने के निर्णय पर कांग्रेस श्रेय लेने की कोशिश कर रही है
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बिहार के सासाराम में Upendra Kushwaha ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि पिछले दिनों पार्टी शिविर में जाति जनगणना तथा बढ़ी जनसंख्या के आधार पर लोकसभा, विधानसभा परिसीमन को लेकर प्रस्ताव लाया गया था। केंद्र सरकार ने जातीय जनगणना की मांग पूरी कर दी, लेकिन लोकसभा, विधानसभा परिसीमन की मांग को लेकर आरएलएम किसी स्तर तक जाएगी।
उन्होंने लोकसभा, विधानसभा के परिसीमन की मांग करते हुए कहा कि अगर नया परिसीमन हो तो बिहार से 40 के बदले 60 सांसद चुनकर लोकसभा पहुंचेंगे, वैसे ही विधानसभा में भी संख्या बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे सभी वर्गों को नुकसान हो रहा है। औसतन 10 लाख मतदाता मिलकर एक सांसद चुनते हैं, जबकि कई ऐसे लोकसभा क्षेत्र हैं, जहां 30 लाख लोग मिलकर एक सांसद चुन रहे हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि रोहतास जिले के विक्रमगंज में 25 मई को संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार महारैली से वातावरण बनाने का कार्य किया जाएगा। दूसरी रैली मुजफ्फरपुर में भी होगी।
Upendra Kushwaha ने कहा कि दक्षिण के कुछ राज्यों ने लोकसभा और विधानसभा परिसीमन का विरोध किया है, लेकिन लोकसभा और विधानसभा की बढ़ती जनसंख्या पर परिसीमन को लेकर पूरी तरह से वातावरण बनाया जाएगा। हमारे संविधान में परिसीमन का प्रावधान बनाया गया है।
Upendra Kushwaha जनसंख्या के आधार पर जो लोकसभा सीट तय होते हैं, वह अभी नहीं है
उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार पर जो लोकसभा सीट तय होते हैं, वह अभी नहीं है। देश में एक सांसद के चुनाव पर मतदाताओं की संख्या सामान्य होनी चाहिए। उन्होंने परिसीमन को लेकर कहा कि महिलाओं के शिक्षित होने से जनसंख्या नियंत्रण हो सकता है। यह आम तौर पर देखा जाता है कि शिक्षित महिलाएं छोटे परिवार में विश्वास करती हैं। यही बिहार में भी देखने को मिल रहा है।

