*गंगा के रौद्र रूप से आधा दर्जन से ज्यादा ग्रामों की आबादी टापू पर *चारों तरफ जल ही जल*
” कोतल नगला पुल एवं संपर्क मार्ग पीड़ितों का बना आशियाना
“पशुओं के लिए चारे का संकट तो वही संक्रामक रोगों का बड़ा खतरा”
#प्रशासन ने राहत सामग्री के पैकेट वितरण में की राजनीति, खाद्यान्न वितरण सूची में घोटाला#
खाद्यान्न वितरण की सूची में दिल्ली बिल्सी उझानी कासगंज रह रहे लोगों के नाम भी,


सहसवान (बदायूं) सहसवान तहसील क्षेत्र में बहने वाली गंगा नदी में बीते कई दिनों से बढ़ रहे जल स्तर ने रौद्र रूप धारण कर लिया है तो उपरोक्त ग्रामों की आबादी क्षेत्र टापू बनकर रह गया है तथा दो ग्राम पंचायत के पांच ग्रामों को पूर्ण रूप से जलमग्न कर दिया है तथा उपरोक्त ग्रामों के आवागमन की सभी मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं गंगा के जल ने जहां आबादी को पूर्ण रूप से जल मग्न कर दिया है तो वही पशुओं के लिए चारे का संकट बढ़ता जा रहा है
प्रशासन ने राहत के नाम पर 5 ग्रामों के 469 परिवारों को प्रदेश शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई राहत सामग्री की किट तो उपलब्ध करा दी पर पीड़ितों की वितरण सूची में राजनीति की गंध आती है स्थानीय राजनीति के चक्कर में दिल्ली उझानी कासगंज बिल्सी आदि स्थानों पर परिवार सहित रह रहे लोगों को भी पीड़ित बनाकर उन्हें भी खाद्यान्न सूची में शामिल कर दिया गया खाद्यान्न सूची में शामिल बाहर से आकर खाद्यान्न पैकेट ले जा रहे हैं समझ यह नहीं आ रहा है की बाढ़ग्रस्त लोग दिल्ली उझानी सौरों बिल्सी में मेहनत मजदूरी प्रोविजन स्टोर चला रहे लोगों को प्रशासन ने कैसे बाढ़ पीड़ित मान लिया जबकि वह तो बड़े शान के साथ अपनी रोजी-रोटी का साधन सूखे में रहकर चैन की बंसी बजा रहे हैं परंतु शासन प्रशासन की सूची में वह बाढ़ पीड़ित बने हुए हैं वहीं बाढ़ पीड़ितों ने खाद्यान्न पैकेट लेने के बाद कहा कि बीते 5 दिन से ग्राम का बड़े हुए गंगा की जलस्तर ने पूर्ण रूप से संपर्क काट दिया है तथा घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है जिसके कारण खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही है विशेष का पशुओं के लिए प्रशासन द्वारा कोई भी खाद्य सामग्री या चारे की व्यवस्था नहीं कराई गई जिससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है। प्रशासन द्वारा ग्राम प्रधानों के सहयोग से पीड़ित परिवारों की बनाई गई सूची में खाद्यान्न के पैकेट उन लोगों को भी वितरण किए गए जो लोग दिल्ली उझानी कासगंज बिल्सी आदि स्थानों पर रहकर मेहनत मजदूरी करते हैं इनमें से उपरोक्त लोग तो कई वर्षों से ग्राम में आए नहीं है चर्चा यह भी है कि उनके आधार कार्ड भी दिल्ली, उझानी ,सोरों ,बिल्सी, कासगंज का पता दर्ज हैं पीड़ितों की सूची बनाने में आधार कार्ड की कॉपी ना लेकर सिर्फ उनके नंबर लिए गए है चर्चा है ग्राम प्रधानों ने अपनी राजनीतिक रोटियां सीखने के उद्देश्य से प्रशासन को धोखा देकर खाद्यान्न बंटवाने का काम किया है।
गौरतलब है सहसवान तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत खिरकवारी मानपुर पुख्ता के मजरा तेलियानगला,तौफी
नगला तथा सितोलिया पुख्ता ग्राम पंचायत के मजरा भमरोलिया, वीर शाह नगला,खागीनगला पूर्ण रूप से जलमग्न हो गए हैं और उनका मुख्य मार्गो से संपर्क टूट गया है उपरोक्त सभी गांव की आबादी टापू बनकर रह गई है तथा बीते कई दिनों से उनका संपर्क मार्ग कटा हुआ है प्रशासन तेलिया नगला तौफी नगला के बाढ़ पीड़ितों को आवागमन के लिए दो नाव की व्यवस्था कर दी है पीड़ित परिवार उसे आवागमन में प्रयोग में ले रहे हैं परंतु प्रशासन द्वारा भमरोलिया, वीर सहाय नगला, खागी नगला में पीड़ित परिजनों को आवागमन के लिए नाव का प्रबंध नहीं कराया है जिससे वह अपने घरों से घरेलू सामान एवं रोजमर्रा के समान ला पानी में उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है वह बात अलग है कि प्रशासन ने उपरोक्त लोगों के ग्रामों को अस्थाई रूप से कैंप करने के लिए जूनियर हाई स्कूल तथा नगला कोतल महावा नदी पुल पर पीड़ितों को ठहरने की व्यवस्था कर दी है तथा पीड़ित परिवार बरसाती तथा वहीं पर प्राथमिक विद्यालय जिसमें बाढ़ चौकी स्थापित है पीड़ित परिवार वहां भी आकर कैंप कर सकते हैं जबकि नगला वरन एवं तौफी नगला के पीड़ित परिवार अस्थाई रूप से महावा नदी पुल पर आश्रय स्थल बनाया गया है तथा बाढ़ ग्रस्त घरों से वह अपना घरेलू सामान तथा पशुओं को लेकर अस्थाई रूप के आश्रय स्थल में पहुंच गए हैं जहां वह पन्नी तानकर परिवार के साथ रह रहे हैं आश्रय स्थल में रह रहे पीड़ित परिवारों को सबसे ज्यादा चिंता अपने पशुओं की है जिन्हें चारे का संकट पैदा हो गया है और वह भूखे प्यासे व्याकुल हो रहे हैं । तथा भारी उमस के चलते संक्रामक रोगों का खतरा मंडराने लगा है लोगों का कहना है कि अभी तक स्वास्थ्य विभाग से कोई भी कर्मचारी उनके स्वास्थ्य का परीक्षण करने नहीं पहुंचा है जबकि कई लोग बुखार एवं उल्टी दस्त से पीड़ित है। खिराक
वारी मानपुरपुख्ता तथा सितोलिया पुख्ता का पंचायत घर बाढ़ के पानी से डूब गया है तो वही एक जूनियर हाई स्कूल भी बाढ़ के पानी से जलमग्न है।
पीड़ित परिवारों को सबसे ज्यादा चिंता भूमि कटान की हो रही है बीते कई दिनों से गंगा के पानी द्वारा बड़े पैमाने पर कटान हो रहा है। जो चिंता का विषय है
एतिहाद के तौर पर बाढ़ चौकिया पर तैनात किए गए अधिकांश कर्मचारी चौकियों से नदारत रहते हैं सिर्फ मोबाइल पर वह अपने संपर्क वाले लोगों से जानकारी लेकर अपने अधीनस्थों को चौकी पर तैनाती का एहसास कराते रहते हैं। अगर प्रशासन की अधिकारी रात के समय अचानक बाढ़ चौकिया का निरीक्षण करें तो निश्चित चौकिया पर तैनात कर्मचारी उन्हें नदारत मिलेंगे। यह कहना उपरोक्त बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के पीड़ित परिवारों का है उनका कहना है कि कर्मचारी मात्र औपचारिकता निभाने के लिए ही आते जाते रहते हैं शेष वह मोबाइल पर ही बाढ़ की स्थिति का आकलन अपने गुर्गों से पल-पल का अपडेट लेते रहते हैं। पीड़ित परिजनों ने बताया की कई पशु तथा लोग संक्रामक रोग से पीड़ित हैं परंतु अभी तक कोई भी चिकित्सीय टीम क्षेत्र में नहीं पहुंची है जिसके कारण स्थिति बिगड़ने की संभावना प्रबल होती जा रही है। इस बाबत एसडीएम सहसवान से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया परंतु संपर्क नहीं हो सका।

