चंडीगढ़ : कोटक महिंद्रा बैंक घोटाले में वीरवार को चौथी गिरफ्तारी हुई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस घोटाले में आरोपी विकास कौशिक तत्कालीन सीनियर अकाऊंट आफिसर नगर निगम पंचकूला को गिरफ्तार किया है।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ए.सी.बी.) के अनुसार जब आरोपी विकास कौशिक बतौर सैक्शन आफिसर नगर निगम पंचकूला में तैनात था, तो उसी दौरान आरोपी विकास कौशिक ने पुष्पेन्द्र मैनेजर कोटैक महेन्द्रा बैंक सैक्टर-11 पंचकूला के साथ मिलकर मई 2020 में नगर निगम पंचकूला का एक फर्जी बैंक खाता सं. 2015073031 खोला। जिसके बैंक अकाऊंट ओपनिंग फार्म पर आरोपी विकास कौशिक ने कमीश्नर नगर निगम पंचकूला व सिनियर अकाऊंट अफसर की मोहरें लगा दी। उन मोहरों पर तत्कालीन आयुक्त सुमिधा कटारिया, आई.ए.एस व तत्कालिन सीनियर अकाऊंट आफिसर सुशील कुमार के उसने व पुष्पेन्द्र ने जाली हस्ताक्षर कर दिए।
ए.सी.बी. के अनुसार आरोपी विकास कौशिक व पुष्पेन्द्र ने मिलकर जून 2022 में फिर से नगर निगम पंचकूला के नाम एक और जाली खाता सं. 2046279112 कोटक महिंद्रा बैंक पंचकूला में खुलवाया। जिसके भी अकाऊंट ओपनिंग फार्म पर बतौर सीनियर अकाऊंट अफसर आरोपी विकास कौशिक ने अपने हस्ताक्षर किए तथा दूसरे सिग्नेटरी डी.एम.सी नगर निगम की जाली मोहर लगा दी थी। इस मोहर पर तत्कालीन डी.एम.सी. दीपक सूरा के हस्ताक्षर भी आरोपी विकास कौशिक व पुष्पेन्द्र मैनेजर ने किए।
आरोपी विकास कौशिक व पुष्पेन्द्र नगर निगम पंचकूला के फर्जी डैबिट पत्र (आर.टी. जी.एस/एन.ई.एफ.टी. नोट) बनाने के बाद फर्जी डेबिट नोट (आर. टी. जी.एस/ एन.ई.एफ.टी. नोट) पर एक सिग्नेटरी के रूप में आरोपी विकास कौशिक अपने हस्ताक्षर कर देता था तथा दूसरे सिग्नेटरी के हस्ताक्षर जाली कर देते थे। उपरोक्त फर्जी बैंक खातों से इन डैबिट पत्रों के माध्यम से पुष्पेन्द्र अपने अन्य बैंक खातों में नगर निगम के रूपए स्थांनातरित कर लेता था।
आरोपी विकास कौशिक व पुष्पेन्द्र कोटैक महेन्द्रा मैनेजर द्वारा फर्जी डैबिट पत्र (आर.टी.जी.एस/एन.ई.एफ.टी. नोट) से नगर निगम पंचकूला के असल खातों में जो एफ.डी. बनी होती थी, उनको प्री मैच्योर तुड़वाकर उसकी राशि को फर्जी हस्ताक्षर करके नगर निगम निगम पंचकूला के नाम से खोले फर्जी खाता नं. 2015073031 व 2046279112 में ट्रांसफर करके फिर उपरोक्त दोनों खातों से आगे रजत ढाहरा, स्वाति तोमर इत्यादि के खातों में ट्रांसफर कर देते थे और फिर पुष्पेन्द्र और आरोपी विकास कौशिक उनको आगे बिल्डरों को वह रूपए ट्रांसफर कर देते थे।
जब जुलाई 2025 तथा फरवरी 2026 में जब नगर निगम ने एफ.डी. बारे तथा खातों में जमा राशि बारे सूचना मांगी, तब दलीप राघव आर.एम. कोटेक महेन्द्रा बैंक सैक्टर-11 ने आरोपी विकास कौशिक से फोन पर विचार-विमर्श किया था, क्योंकि आरोपी विकास कौशिक व पुष्पेन्द्र मैनेजर ने सभी एफ.डीस. को प्री मैच्योर तुड़वा दिया था और उनकी राशि को आगे ट्रांसफर कर दिया था और कोई एफ. डी. या राशि खातों में नहीं थी।

