चंडीगढ़। पंजाब एवं Haryana हाईकोर्ट ने गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम के तहत 2008 में पारित दोषसिद्धि आदेश को यह पाते हुए रद कर दिया है कि केंद्र के खिलाफ शिकायत उचित प्राधिकारी द्वारा नहीं की गई थी।
पानी पर पंजाब-Haryana की जंग जारी, जेजेपी ने राज्यपाल को सौपा ज्ञापन
पीसी एवं पीएनडीटी अधिनियम की धारा 17 के अनुसार, शिकायत राज्य या संघ राज्य क्षेत्र द्वारा नियुक्त उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा की जा सकती है, जिसमें निम्नलिखित तीन सदस्य होंगे। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के संयुक्त निदेशक या उससे ऊपर के पद का अधिकारी, महिला संगठन का प्रतिनिधित्व करने वाली एक प्रतिष्ठित महिला और संबंधित राज्य के विधि विभाग का एक अधिकारी।
Haryana : 2006 में की गई थी शिकायत
जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने कहा कि शिकायत अकेले डॉ. एसके नवल द्वारा दायर की गई थी और इसे पीसी एवं पीएनडीटी अधिनियम की धारा 17 के तहत अधिसूचना द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय समिति द्वारा दायर किया जाना चाहिए था। ऐसा न किए जाने के कारण, शिकायत ही विचारणीय नहीं है और इसलिए बाद की कार्यवाही और दोषसिद्धि दोषपूर्ण हो गई है।

