नई दिल्ली – Finance Minister ने बुधवार को जीएसटी सुधारों पर राज्यों के मंत्रिसमूह के साथ बैठक की। बैठक के दौरान राज्यों के मंत्रिसमूह को जीएसटी व्यवस्था में व्यापक सुधारों के लिए सरकार की योजनाओं के बारे में बताया गया। इन सुधारों में कर की दरों में कटौती और व्यवसायों के लिए अनुपालन बोझ को कम करना शामिल है।
Finance Minister Sitharaman आज से मेघालय के चार दिवसीय दौरे पर
प्रस्ताव में कहा गया है कि केंद्र सरकार जीएसटी दरों को मौजूदा 5%, 12%, 18% और 28% की चार कैटेगरी से घटाकर मुख्य रूप से 5% और 18% की दो कैटेगरी में लाने की योजना बना रही है। वहीं, sin goods (जो समाज के लिए हानिकारक माने जाते हैं) पर 40% की विशेष दर लागू करने का सुझाव भी शामिल है।
बीमा कराधान और क्षतिपूर्ति उपकर पर गठित मंत्री समूह दो दिनों तक केंद्र के ‘अगली पीढ़ी’ के जीएसटी सुधारों पर विचार-विमर्श करेगा। खबर के मुताबिक, Finance Minister ने लगभग 20 मिनट के अपने संबोधन में इन सुधारों की जरूरत और इससे होने वाले लाभों को राज्यों के प्रतिनिधियों के सामने रखा।
यह बैठक दो दिनों तक चलेगी, जिसमें रेट रेशनलाइजेशन, बीमा पर टैक्स और मुआवजा उपकर जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है। बीमा क्षेत्र से जुड़े GoM स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर जीएसटी दरों को कम करने पर विचार कर रहा है। वहीं, मुआवजा उपकर समूह इसके भविष्य को लेकर सुझाव देगा, खासकर ऐसे समय में जब उधार चुकाने की समयसीमा खत्म हो रही है।
Finance Minister निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम है और केंद्र सरकार आने वाले हफ्तों में राज्यों के साथ आम सहमति बनाने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि जीएसटी सुधारों पर केंद्र का प्रस्ताव तीन स्तंभों पर आधारित है- संरचनात्मक सुधार, दरों को युक्तिसंगत बनाना और जीवन में आसानी।
एक SBI रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो इससे सरकार को सालाना लगभग ₹85,000 करोड़ का राजस्व घाटा हो सकता है। अगर नई दरें 1 अक्टूबर से प्रभावी होती हैं, तो चालू वित्त वर्ष में करीब ₹45,000 करोड़ की क्षति हो सकती है।
Finance Minister अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम है
बता दें कि वर्तमान में जीएसटी 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत की दर से लगाया जाता है। खाद्य और आवश्यक वस्तुओं पर शून्य या 5 प्रतिशत की दर से कर लगता है, जबकि विलासिता और अवगुण वस्तुओं पर 28 प्रतिशत की दर से कर लगता है, जिसके ऊपर उपकर भी लगता है।

