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किसान विरोधी केंद्र सरकार की नीति के कारण किसानों को नहीं मिल रहा है एमएसपी : Devendra Yadav

On: March 21, 2025 5:12 PM
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Devendra Yadav
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नयी दिल्ली: दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष Devendra Yadav ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित केन्द्र सरकार की किसानों के प्रति दोहरी नीति के कारण किसानों को उनकी फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएमपी) मूल्य नहीं मिल रहा है।

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Devendra Yadav आज यहां कहा कि पूंजीपतियों का संरक्षण करने वाली भाजपा सरकार सरसों की फसल पर एमएसपी को एक अप्रैल से पंजीकरण कराऐंगी, जबकि फसल 15 फरवरी से ही मंडियों में आने लगी है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा सरसों की खरीद में देरी के कारण किसानों को प्रति क्विंटल 950 रुपये का नुकसान हो रहा है।

Devendra Yadav ने बताया कि सरसों की एमएसपी खरीद का तय मूल्य 5950 रुपये है, जबकि मंडियों का दाम 5000 रुपये प्रति क्विंटल है। इस तरह से किसानों को प्रति बीघा नुकसान 4750 रुपये हो रहा है क्योंकि एक बीघा में 95 क्विंटल सरसों होता है। वहीं, 10 बीघा जमीन की सरसों की फसल का नुकसान 47,500 रुपये तक हो रहा है।

Devendra Yadav ने कहा कि किसान सरकार से पिछले तीन वर्षों से लगातार एमएसपी पर सरसों की खरीद को 15 फरवरी से लागू करने का अनुरोध कर रहे हैं, लेकिन भाजपा पूंजीपतियों और व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए पंजीकरण में जानबूझकर देरी करती है।

उन्होंने कहा कि सरकार का बाजार भाव और एमएसपी खरीद पर कोई नियंत्रण नहीं है क्योंकि गेंहू की एमएसपी खरीद मूल्य 2525 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि मंडियों में गेंहू 2800 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है।

Devendra Yadav सरकार का बाजार भाव और एमएसपी खरीद पर कोई नियंत्रण नहीं

Devendra Yadav ने कहा कि भाजपा सरकार ने पूंजीतियों के हित में पहले तीन काले कृषि कानूनों को जबरन लागू किया, लेकिन किसानों के लम्बे विरोध और विपक्ष के दबाव के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशव्यापी माफी मांग कर कृषि कानूनों को वापस तो ले लिया लेकिन किसानों की मांगों को मानने पर अभी तक कोई फैसला नही लिया गया है।

श्री यादव ने कहा कि भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों किसान विरोधी हैं। तीन काले कृषि कानूनों को लागू करने में दोनों पार्टियां एकमत थीं। पिछले 13 महीनों से धरने पर बैठे किसानों को पंजाब में बलपूर्वक हटाया गया है।

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