रांची। भारत की जनगणना के फॉर्म में आदिवासियों के लिए ‘सरना’ धर्मकोड की मांग झारखंड में बड़ा सियासी मुद्दा बन गई है। इसे लेकर सोमवार को झारखंड प्रदेश Congress ने रांची में राजभवन के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया।
Congress कई शहरों में 24 से 31 मई तक ‘जय हिंद’ सभा करेगी
इसके बाद Congress के प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा, जिसमें केंद्र सरकार से मांग की गई है कि आदिवासियों की स्वतंत्र धार्मिक पहचान सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि उनके लिए जनगणना प्रपत्र में अलग कोड की व्यवस्था की जाए।
धरना-प्रदर्शन की अगुवाई Congress के झारखंड प्रभारी के. राजू, सह प्रभारी सिरीबेला प्रसाद और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने की। इस दौरान झारखंड सरकार में कांग्रेस कोटे के मंत्री इरफान अंसारी, शिल्पी नेहा तिर्की, दीपिका पांडेय सिंह, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव प्रणव झा, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, सांसद सुखदेव भगत, वरिष्ठ विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव, राजेश कच्छप, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।
धरना में प्रदेश भर से Congress के नेता-कार्यकर्ता शामिल हुए
धरना में प्रदेश भर से कांग्रेस के नेता-कार्यकर्ता शामिल हुए। धरनास्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कहा कि आदिवासियों का अपना अलग धर्म है। वे प्रकृति पूजक हैं। झारखंड के आदिवासी सरना धर्म को मानते हैं।
देश के दूसरे प्रदेशों में भी आदिवासी इसी धर्म को किसी और नाम से मानते हैं। जनगणना के फॉर्म में सिर्फ छह धर्मों हिंदू, इस्लाम, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध के लिए कोड की व्यवस्था है। आदिवासियों के लिए भी अलग कोड इसलिए जरूरी है ताकि वे स्वतंत्र रूप से अपनी धार्मिक पहचान दर्ज कर सकें।

