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Congress की बड़ी योजना, ‘संविधान बचाओ रैली’ में उठाएगी जातीय जनगणना का मुद्दा

On: May 4, 2025 6:35 PM
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Congress
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नई दिल्ली। Congress पार्टी ने अपने नेताओं से देश भर में ‘संविधान बचाओ’ रैलियों के दौरान जाति जनगणना के मुद्दे को आक्रामक तरीके से उठाने को कहा है। अखिल भारतीय Congress कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने तमाम Congress  प्रदेश अध्यक्षों और कांग्रेस विधायक दल के नेताओं को जातिगत जनगणना को लेकर सीडब्ल्यूसी में पारित प्रस्ताव की जानकारी दी।

बिलासपुर में 8 मई को Congress की संविधान बचाओ रैली होगी

कांग्रेस 25 अप्रैल से देश भर के सभी राज्यों में संविधान बचाओ रैलियां कर रही है और अब चाहती है कि उसके नेता जाति जनगणना पर कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्तावों को भी उठाएं।

Congress पार्टी ने शनिवार को अपने राज्य प्रमुखों, कांग्रेस विधायक दल के नेताओं, महासचिवों, सचिवों और अपने सभी फ्रंटल संगठनों को “अनुसूचित संविधान बचाओ रैलियों के दौरान जाति जनगणना पर कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव का क्रियान्वयन” नाम से एक सर्कुलर जारी किया।

पार्टी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के निरंतर और सैद्धांतिक दबाव के बाद, मोदी सरकार, जिसने लंबे समय से इस मांग का उपहास उड़ाया, इसमें देरी की और इसे खारिज कर दिया, अब जाति-वार जनगणना के लिए वास्तविक और लोकतांत्रिक आह्वान को स्वीकार करने के लिए मजबूर हो गई है।”

इसमें कहा गया है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को औपचारिक रूप से पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने अपडेटेड और व्यापक जाति जनगणना की पार्टी की मांग दोहराई थी। राहुल गांधी ने भी दृढ़ता से कहा है कि सामाजिक न्याय के लिए जाति जनगणना की आवश्यकता है।

2 मई को Congress कार्यसमिति ने जाति जनगणना के मुद्दे पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।

उन्होंने कहा, “2 मई 2025 को कांग्रेस अध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजित सीडब्ल्यूसी की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की गई और एक अहम प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि संविधान के अनुच्छेद 15(5) को तुरंत लागू किया जाए, ताकि ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों को निजी शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ मिल सके।

इसके साथ ही बिना किसी देरी या नौकरशाही बहानों के जातिगत जनगणना कराई जाए, इसके लिए पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया अपनाई जाए, जिसमें संसद में तत्काल बहस और पूरी बजटीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।”

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