कुरुक्षेत्र। राष्ट्रव्यापी विकसित कृषि संकल्प अभियान की कड़ी में हरियाणा के CM Naib Singh Saini ने धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र से विकसित कृषि संकल्प अभियान का आगाज किया। इस अभियान का उद्देश्य किसानों को नई तकनीक, योजना और नवाचार से जोड़कर कृषि क्षेत्र में सुधार लाना है।
लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई, ड्रेनों की सफाई को प्राथमिकता दें : CM Naib Singh Saini
किसानों को खरीफ फसलों की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी देना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व को समझाना और सरकारी योजनाओं व नीतियों का लाभ पहुंचाना है। इस अभियान के तहत किसानों से सीधा संवाद करके फीडबैक लेकर कृषि अनुसंधान को एक नई दिशा मिलेगी। आज से आगामी 12 जून तक प्रदेशभर में चलाया जा रहा यह अभियान, किसानों को सशक्त करने की प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय परिसर में हरियाणा के कृषि, बागवानी, मत्स्य और पशुपालन विभागों तथा आईसीएआर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए किसानों को संबोधित करते हुए CM Naib Singh Saini ने कहा कि किसानों की मेहनत, धैर्य और समर्पण से ही आज भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना है।
CM Naib Singh Saini ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से हर किसान को नीति का सहभागी और नवाचार का भागीदार बनाएंगे। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन है, जो किसानों को ज्ञान, नवाचार और तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। यह अभियान एक ऐसी त्रिवेणी है, जिसमें कृषि वैज्ञानिक, कृषि से जुड़े विभागों के अधिकारी और किसान एक-दूसरे से सीधा संवाद करेंगे।
समृद्ध भारत तभी संभव होगा, जब हमारा किसान खुशहाल और आत्मनिर्भर बनेगा -CM Naib Singh Saini
नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘विकसित भारत’ का जो संकल्प लिया है, उसमें हमारे अन्नदाता को एक प्रमुख स्तंभ माना है। एक विकसित, मजबूत और समृद्ध भारत तभी संभव होगा, जब हमारा किसान खुशहाल और आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की संयुक्त पहल है।
उन्होंने कहा कि इस महा अभियान के तहत देशभर में 2 हजार से अधिक कृषि वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों की टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें गांव-गांव जाकर लगभग डेढ करोड़ किसानों से सीधा संवाद करेंगी। यह अपने आप में कृषि क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा जनसंपर्क अभियान होगा। इस दौरान किसानों को स्थानीय जलवायु, मिट्टी और फसलों के अनुरूप विशेष सुझाव दिए जाएंगे।

